व्यंग - थोड़ा पढ़ भी लो -राष्ट्रपति की दौड़ में कहाँ हैं अडवाणी

Nanhe Sipahi | May 20, 2017 07:05 PM


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व्यंग - राष्ट्रपति की दौड़ में कहा है आडवाणी

हाँ तो भैया कहाँ हैं आडवाणी जी ? सच कहे तो अच्छी मार्केटिंग और समय ने आडवाणी की खटिया मार्ग दर्शक मंडल में क्या बिछाई, आडवाणी जी आज कल दिखते ही नही , कुछ लोग अब भी यही सोच रहे हैं की बूढी गाय 'मन' भर चारा खा कर 100 किलो दूध देगी, तो दुकान बंद करीए सरकार, आपकी खटाल किसी और ने लूट ली हैं . आज जब राष्ट्रपति चुनाव नुक्कड़ पर खड़ा है तो रोटियां सिकने लगी हैं , काना फुस्सी शुरू ही समझो की किसको कितनी परोसी जाये. जमाना बदल चूका है आडवाणी जी की राम लहर वाली रथ यात्रा अब पुरानी बातें हो गयी अब तो फेसबूकिया जमाना है. देश के फेसबूकिया छोकरे अब वही पर राष्ट्रपति तय कर लेते हैं, जब देश प्रधानमंत्री डिजिटल चुन सकता है तो राष्ट्रपति चुनाव किस खेत का टमाटर है. आडवाणी जी का दर्द समझना है तो टाइम मशीन में बैठना पड़ेगा,





चलिए 90 के दशक का बटन दबाते है, ये सोचते हैं की शुरू किसने किया




90 के दशक में जब 'जुकेरबर्ग' लट्टू खेल रहे होंगे उस समय अपने तरह की like बटन दबाये, आडवाणी जी देश जीतने निकल पड़े, रामलला भी साथ हो ही लिए, कहाँ २ सांसदों वाले आडवाणी ने इतने कमल खिलाये की राम नाम वाले 'सीता राम केसरी ' लाल हो गए , कांग्रेस संसद में दाये से बाएं हो गयी (हम बैठने की दिशा की बारे में बोल रहे हैं), इतना सब कुछ हुआ पर जीत के लड्डू वाजपेयी ले उड़े, आडवाणी अपने दागदार छवि और अटल अपनी उदारवादी छवि की साथ रेस में first आये और देश के प्रधानमंत्री बनें, आडवाणी जी को सांत्वना पुरस्कार से ही संतोष करना पड़ा इस प्रकार आडवाणी जी का सपना पहली बार टुटा, फिर जब २००४ में इंडिया शाइन कर रहा था तो गुजरात ने भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों पर कालिख पोत दी, अटल जी तो राजनीति छोड़ चले गए छोड़ गए अपनी विरासत, PM in waiting आडवाणी .





साल गुजरता गाया सदा मौन प्रधानमंत्री ने लौह पुरुष आडवाणी की बोलती बंद की २००७ में और PM in waiting, waiting वाली लाइन में फिर से सबसे आगे खड़े हो गए, दौर बदल चूका था जब २०११ में देश अन्ना हज़ारे के साथ नारे लगाने में busy था तो गुजरात के मोदी देश के मोदी बनने की तैयारी में लग चुके थे, वहां आडवाणी अब भी यही सोच रहे थे की वो ही PM in waiting है, खतरों से दूर आडवाणी खरगोश और कछुए वाले रेस की तरह बॉर्डर लाइन पर जाके सो गए , अब कोई उन्हें बताये तब तो की राम लहर वाले like बटन अब expire हो चुकी थी , जब अडवाणी 2014 का इंतज़ार करने में busy थे गुजरात वाले मोदी india272+ वाली वेबसाइट चला रहे थे.






आडवाणी जी को अगला सेण्टर शॉक तब लगा जब मोदी गुजरात 4थी बार जीते और इस बार जीत का शुक्रिया हिंदी में कहा , सीधा संकेत अब देश के होने वाले थे मोदी, मोदी ने जीत की बाद कहा "दिल्ली हो आऊंगा" , क्या मैनेजमेंट साहब , एक दम ज़बर, सच में मोदी दिल्ली में बोलिंग करने क्या आये अडवाणी जी तो टोटल बोल्ड ही हो गए कसम से . मोदी जी को बाद में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुना गाया तब अडवाणी जी अपनी निद्रा से जागे, परशुराम बने आडवाणी ने इतने पैर पटके , उतनी उछाल मारी पर बूढ़े अडवाणी कितना उछल पाते , दबंग RSS ने आडवाणी की बोलती ऐसे बंद की , ऐसे बंद की , छोड़िये अब ज्यादा बताने की जरुरत है क्या की कैसे बंद की ?








हाँ तो आडवाणी जी PM in Waiting वाले शब्द से वेटिंग नही हटा पाए और देश को पहला in waiting वाला प्रधानमंत्री प्राप्त हुआ , आज आडवाणी जी को कई और बुजुर्गो के साथ मार्ग दर्शक मंडल वाले वृद्धाश्रम में रखा गाया है, तवे पर जैसे ही रोटियां फिर से सिकने लगी की शायद राष्ट्रपति तो बन ही जाएंगे वैसे ही 1990 के दशक में शिव सेना UP के प्रभारी रहे पवन पांडेय ने इतनी जोर से फुक मारी है की गुब्बारा फट ही गाया समझो , अब महोदय ये बोल गए की महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और UP से ट्रैंनिंग देकर लाए गए छोकरो ने बाबरी ढांचा गिरा दिया और सब कुछ प्लान के अनुसार हुआ, अब तक भीड़ की करवाई कह कर बचते रहे अडवाणी फिर से हॉट चेयर पर बैठे है , बाकि कसर सुप्रीम कोर्ट ने ये संकेत दे कर पूरी कर दी , की अडवाणी पर बाबरी ढांचे वाले मुद्दे पर केस चलाया जा सकता है , अब तो बस फुस्स है ...






हाँ तो हम शुरू कहा से हुए थे ....



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