जिसने आडवाणी को रोका वो है आज मोदी का विशेष

Nanhe Siphi | Sep 03, 2017 02:09 PM


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बिहार के भूतपूर्व गृह सचिव अफजल अमानुल्ला ने एक इंटरव्यू में कहा था कि 1990 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के आदेश देने से पहले राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने उन्हें विचलित कर दिया था. सत्य कल्पना से भी परे होता है. लालू यादव भले ही आडवाणी कि गिरफ़्तारी का श्रेय लेते रहे हों पर अफजल अमानुल्ला का कहना ठीक इसके उलट है. अफ़ज़ल अमानतुल्ला कहते हैं कि लालू प्रशाद यादव ने खुद उन्हें ये आदेश दिया था की आडवाणी को गिरफ्तार नहीं किया जाये क्यों कि अगर ऐसा हुआ तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते थे और आडवाणी कि गिरफ़्तारी का व्यापक राजनीतिक प्रभाव हो सकता था. अमानतुल्ला को लालू प्रसाद ने कहा था कि वो तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री वी पी सिंह के संपर्क में है और केंद्र का भी ऐसा ही मानना है कि अगर आडवाणी की गिरफ़्तारी होती है तो केंद्र की वी पी सिंह की सरकार गिर जाएगी.



बाद में बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी की गिरफ़्तारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू को राजनीतिक केंद्रों के शीर्ष तक पहुंचाया और उन्हें धर्मनिरपेक्षियों का समर्थन प्राप्त किया साथ ही अपनी एक खास छवि स्थापित करने में भी लालू को इस गिरफ़्तारी ने मदद पहुंचाई. पर क्या आप जानते हैं कि आडवाणी के रथ को किसने रोका था. वो कड़क अफसर थे आर के सिंह. 1990 में समस्तीपुर में 'रथ यात्रा' के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार करने की हिम्मत रखने वाले पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने भाजपा में तब के पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के सामने १३ दिसंबर २०१३ को भारतीय जनता पार्टी में एंट्री मारी.




तब से अबतक आरके सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के अंदर अपनी कद्दावर छवि बना ली है और आज लगभग ३ साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में आरके सिंह को भी जगह मिली है.

राजकुमार सिंह एक पूर्व भारतीय नौकरशाह हैं और भारत सरकार के अंदर राज्य मंत्री बनाये गए हैं. वह मई 2014 से भारतीय संसद के सदस्य हैं. सिंह 1975 बिहार कैडर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं और पूर्व गृह सचिव भी रह चुके हैं. 30 अक्टूबर 1990 को समस्तीपुर में लाल कृष्ण आडवाणी के रथ को रोकने के बाद ये लाइमलाइट में आये. गिरफ्तारी लालू प्रसाद यादव सरकार के आदेश से की गई थी. वर्तमान में ये बिहार के आरा लोकसभा सीट से सांसद भी हैं.

आरके सिंह को यूपीए-२ के कार्यकाल के दौरान पी चिदंबरम ने उनकी कार्यकुशलता और no-nonsense ऐटिटूड की वहज से अपने साथ काम करने के लिए भी चुना था. हालाँकि चिदंबरम के बाद जब सुशिल कुमार शिंदे के साथ उनके सम्बद्ध कुछ मधुर नहीं रहे, शिंदे का मानना था की सिंह ने निर्भया रेप केस वाले मुद्दे पर अच्छा प्रबंधन नहीं किया है. बाद में आर के सिंह ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस में दुनिया को ये बताया था की कैसे शिंदे भी उस केस में लिप्त थे और कैसे शिंदे जाँच को प्रभावित करने की कोशिशें की थीं.



सिंह ने यूपीए के कार्यकाल में Italian मरीन को छोड़े जाने वाले मसाले में भी सरकार के ऊपर में आरोप लगाए थे. साथ ही साथ इशरत जहाँ केस के बारे में भी बताया था की कैसे UPA सरकार और पी चिदंबरम ने अपने राजनैतिक फायदे के लिए एफिडेविट बदल दी थी.

जो भी हो दुनिया आर के सिंह को कड़क अफसर के रूप में हमेशा याद रखेगी और उम्मीद करते है की बचे हुए २ सालो में आर के सिंह देश को नयी दिशा भी देंगे.



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