जरा हट के - क्या आपने गायत्री और गौरी सावंत का नाम सुना है ? एक बहुत ही बेहतरीन वीडियो देखिये

Nanhe Sipahi | Jun 21, 2017 11:06 AM


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हाल ही में विक्स ने मदर डे पर अपना एक ऐड निकला जो काफी चर्चे में था. चर्चा का कारण था इसके कलाकार गायत्री और गौरी सावंत. ये एक असली जिंदगी पे आधारित कहानी है जो माँ बेटी के रिश्ते को नए तरीके से परिभाषित करती हैं . ये है वो विडिओ.


 

गौरी सावंत की असल जिंदगी पे गौर करने पे मालूम चलेगा की कितनी मुश्किलों का सामना करके उन्होंने इस मुकाम को पाया है. गौरी, 37 का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था और वो पिछले 20 सालों से मुंबई में रह रहीं हैं. गौरी का असली नाम गणेश सुरेश सावंत है. 9  साल की उम्र में जब गौरी की माँ का देहांत हुआ, तब से उन्हें ये मालूम चलने लगा की वो बाकी लड़को से अलग हैं. माँ के गुजर जाने के बाद गौरी(गणेश) को उनकी दादी ने अपने पास रखा था. उम्र के साथ गौरी में लड़कीओ जैसी भावना आनी शुरू हुई और जिसका असर उसके बोल चाल और बर्ताव पे भी दिखा. उनके इस बर्ताव से स्कूल के बच्चे उन्हें अक्सर चिढ़ाया करते और भद्दे नामो से बुलाते.

14 - 15 सालो में खुद के अंदर आते बदलावों को गौरी अच्छे से समझने लगी थी, लेकिन उसका परिवार अपने गणेश(गौरी) को ऐसे बदलते देखना नहीं चाहता था. घर से निकले जाने के बाद गौरी "हमसफ़र ट्रस्ट" के संपर्क में आयी , जिसने गौरी के इस रूपांतरण में मदद की. बिना घर के ऐसे बड़े बदलाव से गुजरना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. आगे जाकर 2000 में अशोक राव कवी के साथ मिलके गौरी ने "सखी चार चौघी" नाम का N G O  खोला. "सखी चार चौघी"  का मकसद गौरी जैसे बाकियो को उनका हक़ दिलाने का है. १७ साल बाद आज गौरी के 150 लोगो की ये N G O सुरक्षित यौन सम्बन्ध और हिजड़ों को परामर्श देने का काम कर रही है. 2013 में गौरी ने National Legal Services Authority (NALSA) में याचिका जारी की जिसके परिणाम स्वरुप 3 साल बाद 2016 में उच्चतम न्यायलय ने हिजरो को तीसरे लिंग के तौर पे स्वीकार किया. हालांकि आज भी उन्हें अपने मूलभूत अधिकारों के लिए लड़ना पड़ रहा है.

लेकिन इतने हलचलों के बाद भी गौरी खुद के एक सक्षम माँ मानती है. गौरी कहती है "माँ तो माँ होती है, उनका कोई लिंग निर्धारण थोड़े होता है" . गायत्री गौरी की बेटी है, जिसे गौरी ने एक अनाथालय से गोद लिया था. गायत्री की माँ के निधन के बाद गायत्री की दादी ने उसे कोलकाता के सोनागाछी में बेच दिया था जो की पुरे एशिया का सबसे बड़ा वेश्यालय है. गायत्री की गोद लेने के बाद गौरी ने पुरे मन से उसकी परवरिश की है. साथ में सड़क पे चलते हुए लोग उन्हें संशय की दृष्टि से देखते है, लेकिन गौरी को अपने आप पे पूरा भरोसा और गर्व है. गायत्री भी पुरे मन से गौरी को अपनी माँ मान चुकी है. गायत्री और गौरी समाज के आलोचनाओं से लड़ते हुए  माँ बेटी के रिश्ते को एक नया आयाम दे रहे हैं और अब काफी लोग उनके सहयोग में आगे आ रहे हैं. 



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