सिबलिंग jealousy - ख़राब होते भाई बहनो के सम्बन्ध

Chandni | Aug 11, 2017 12:08 PM


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ये बात बिलकुल सही है की आज कल competition बहुत बढ़ गया है। कही एक सही मुकाम पाना है तो इस प्रक्रिया से गुजरना ही पड़ता है। हर किसी को, चाहे वो यार दोस्त हो या अपने सगे भाई बहन। अगर कम्पटीशन दोस्तों क बीच हो तब थोरी देर के लिए उसको भुलाया भी जा सकता है पर जब ये अपने ही भाई बहन के बीच आ जाये तो कुछ हासिल होने के बजाये दूरियां आना स्वाभाविक है। सगे भाई बहनों में एक दुसरे से अच्छा और आगे बढ़ने की होड़ को ही सिबलिंग jealousy कहते है। माता पिता सोचते है की चलो अच्छा है दोनों आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे है पर होता कुछ और है sibling jealousy कभी कभी बड़ा रूप भी ले लेती है जिसके कारण चीज़े बिगरने लगती है। इसका सबसे बड़ा उदहारण हमारे सामने ही है। दिवंगत धीरुभाई अम्बानी के पुत्र मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी, विश्व की सबसे अमीर व्यक्ति के लिस्ट में दोनों भाई पांचवे और छठे नंबर पर हैं। दोनो भाई एक दुसरे को निचा दिखने में तो कोई भी कसर नहीं छोड़ा। इन्होने सार्वजनिक रूप से अपने आपसी मतभेद को तब रखा तब अनिल अम्बानी ने प्राकृतिक गैस विवाद के मामले में भारत सरकार के ऊपर सीधा सीधा निशाना साधा की पेट्रोलियम मंत्रालय उनके भाई मुकेश अम्बानी की तरफदारी कर उन्हें निजी लाभ पंहुचा रही है। इस मसले पर पेट्रोलियम मंत्रालय से ये प्रतिक्रिया भी आई थी की ये दोनों भाई सार्वजनिक रूप से उन चीजों के लिए लड़ रहे है जो वास्तव में उनकी है ही नहीं। शायद उनकी माँ कोकिलाबेन अम्बानी ने दोनी भाइयों के बीच के इर्ष्या को भाप किया था इसलिए अपने पति की मृत्यू होते ही दोनों भाइयों के व्यवसाय का बटवारा कर दिया था। कुछ ऐसी चीज़े है जो भाई बहनों में आ रही दूरियों को दूर कर सकते है या कम करने की कोशिश कर सकते है:

1.प्रतिस्पर्धा की अहमियत- हम ये नहीं कह रहे की प्रतिस्पर्धा अच्छी बात नहीं है पर एक हद तक, छोटे बच्चो में प्रतिस्पर्धा का होना अच्छी बात है क्यों कि इससे बच्चे एक दुसरे के नजदीक आते है और उनको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी मिलती है पर जैसे जैसे उनकी उम्र बढती है ये प्रतिस्पर्धा भी बढती है और इर्ष्या का रूप ले लेती है।



2.हरकतों पर नजर रखे: बच्चे जब बड़े हो रहे हो तब उनपर माता पिता की पूरी नजर होनी चाहिए बच्चे के हरकत में अगर जरा सा भी ईर्ष्या का भाव नजर आये तो उसी वक़्त बच्चे को समझा बुझा के उसकी ईर्ष्या  को दबा देनी चाहिए।





3.बच्चो को समय दे- हर बच्चे अपने माँ बाप का वक़्त चाहते है और अगर वो उन्हें नहीं मिलता तो वो कुछ अजीबोगरीब हरकत से अपने तरफ ध्यान आकर्षित करते है। ऐसे में माता पिता को अपने बच्चो के साथ बातें करनी चहिये। उनसे स्कूल के बारे में, खेल कूद के बारे में, उनके दोस्तों के बारे में बातें करनी चाहिए। रात को सोने के पहले उनके बिस्तर पे लेट कर ऐसी बातें की जा सकती है जिससे बच्चे आपसे मन से जुड़ पाएंगे।




4. बच्चो की सुने- ये हर घर की बात है जहाँ दो बच्चे होते है वहां जब भी दो बच्चे आपस में लड़ते झगरते है वहां अक्सर येही होता है की माँ बाप छोटे बच्चे के पक्ष में फैसला ले लेते है।। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए माँ बाप को हमेशा दोनों बच्चो का पक्ष सुनना चाहिये और फैसला हमेशा ईमानदारी से ही करना चाहिए ओर बच्चो को उनकी गलती भी बताना चाहिए।



5. तुलना न करे- अक्सर ये देखा जाता है की माँ बाप दो बच्चो को एक दुसरे से तुलना करते है। जो बहुत गलत बात होती है। इससे एक बच्चा हीन भावना से ग्रसित हो जाता है और वो मौका तलाशता है अपने भाई या बहिन को निचा दिखाने के लिए।



ये सभी छोटी छोटी बातें पर ध्यान न देने पर ये बड़ी हो जाती है और आगे जा कर एक बड़े घटना को अंजाम देती है।