जब बम्बई को दहेज़ में दान कर दिया गया था

Nanhe Sipahi Prashant | Jul 07, 2017 03:07 PM


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मुंबई आज भारत के आर्थिक शक्ति का केंद्र है. ये सबसे बड़े और मुख्य शहरों में आता है जो पुरे भारत से लोगो को एक बेहतर जीवन के लिए आकर्षत करता है. लेकिन क्या आप ये जानते है की कभी पुरे के पुरे मुंबई शहर को दहेज़ के तौर पे दान दे दिया गया था??


आइए जानते है इसकी मजेदार कहानी को:

आज से 500 साल पहले मुंबई 7 द्वीपों का एक समूह था. इसका इतिहास 1000 साल तक जाता है जब ये कभी मगध साम्राज्य का हिस्सा था. उसके बाद इसपर  सिल्हारा वंश के शाषको ने राज किया. सोलहवीं शताब्दी आते आते इसपे  गुजरात के सुल्तान का कब्ज़ा हो चूका था. जब पोर्तुगी भारत आये तो धीरे धीरे अपना प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाते बढ़ाते अंततः मुंबई पे भी अपना कब्ज़ा कर लिया. 1534 में मुंबई के द्वीपों पर पोर्तुगी का कब्ज़ा हुआ और इसे व्यापार का केंद्र बनाया गया. यहाँ से सूती कपडे, तम्बाकू, अफीम , फलों का व्यापर काफी जोर पकड़ रहा था. पुर्तग़ालिओ ने यहाँ अपने किले, एक बड़ा सा अनाज गृह और नयी सड़को का निर्माण भी शुरू किया. जल्दी ही मुंबई व्यापारिओं के सबसे प्रिय ठिकानो में से एक बन गयी. जल्दी ही ये जगह पोर्तुगी के द्वारा BOM BAHIA जिसका अर्थ होता है "A GOOD BAY", कही जाने लगी. बाद में ब्रिटिशो द्वारा BOM BAHIA "बॉम्बे" बन गयी.


1661 में ब्रिटिश राजकुमार चार्ल्स II की शादी पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन से कराई गयी. इसी शादी में दहेज़ के तौर पे पूरी मुंबई को पुर्तगाल ने ब्रिटैन परिवार को  दी गयी. बात यही पे ख़त्म नहीं हुई. प्रिंस चार्ल्स को इस शहर में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी. अतः उन्होंने इस शहर को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को किराये पे दे दिया. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी किराये के तौर पे राज परिवार को 10 पौंड प्रति वर्ष भुगतान करती थी. तो ये था मजेदार इतिहास हमारे मुंबई शहर का.



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