OPERATION OVERLORD ने जानिए कैसे युद्ध की दिशा तय की - नोर्मंडी का युद्ध

Prashant Shekhar | May 24, 2017 10:05 AM


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6 अगस्त  1945 के दिन जापान के हिरोशिमा शहर के ऊपर पहली बार एटॉमिक बम का प्रयोग किया गया, और इसके साथ ही ख़त्म हुआ 30 सालो के युद्धों का वो क्रम जिसने मानवता  को अपने अंत के कागार पर ला खड़ा कर दिया था. 6 साल चले इस विश्व युद्ध का परिणाम था मित्र देश  (अमेरिका, ब्रिटैन, रूस) की जीत और जर्मनी , इटली तथा जापान की हार. हालांकि हमेशा से युद्ध की स्थिति मित्र देशो के अनुकूल  नहीं थी, बल्कि एक समय तो ऐसा भी था जब यूरोपियन महाद्वीप समूह में रूस, स्वीडन, पुर्तगाल, स्पेन और इंग्लैंड को छोर पूरे महाद्वीप पे हिटलर की नाजी फौजो का कब्ज़ा था. जर्मनी ने इस युद्ध में ब्लिट्ज स्ट्रीक नामक नयी युद्ध नीति को अपनाया था जो की बहोत ही कारगर साबित हो रही थी . अंततः 6 जून 1944 को मित्र देशो ने मिलकर अकेले जर्मनी पे हमले करने की योजना  बनाई जिसका नाम दिया गया OPERATION OVERLORD .




 

OPERATION OVERLORD .के अंतर्गत फ्रांस के ओमाहा बीचों पर जो की उस वक़्त जर्मनी के कब्जे में था , एक साथ करके १३ देशो की सेना को उतरने की योजना बनायीं गयी . हमले का स्थान चुना गया नोर्मंडी.  नोर्मंडी के इस युद्धं ने द्वितीय विश्वयुद्ध की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख दी.

 

इस ऑपरेशन को अंजाम में लाने के पीछे तीनो देशो के अपने व्यक्तिगत हीत थे. अमेरिका प्रशांत महासागर में जापान के बढ़ते हुए प्रभाव को अपने उपनिवेशों के लिए एक खतरे के तौर पे देख रहा था . पर्ल हारबर की घटना के बाद से ही जापान अमेरिका के दुश्मनो के सूची में सबसे ऊपर था. वहीँ जर्मनी से स्टेलिनग्राद और कृस्क की लड़ाई लड़ने के बाद रूस फिर से किसी दूसरी लड़ाई के लिए तैयार नहीं था. इंग्लैंड हिटलर के ब्लिट्ज स्ट्रीक की मार पहले से ही झेल रहा था. ब्लिट्ज स्ट्रीक के हमले ने लंदन के 60% से ज्यादा के क्षेत्र को बर्बाद कर रखा था. इस परिस्थिति में युद्ध कला के सबसे मूलभूत सिद्धांत , दुश्मन का दुश्मन दोस्त , ने तीनो देशो को आपस में संधि बनाने पर मजबूर कर दिया. ईरान के तेहरान में अक्टूबर 1943 को तीनो देशो के सचिव, अमेरिका के राष्ट्रपति JF  Rosevelt , इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंती Wiston  Churchill और रूस के तानाशाह Joseph Stalin की मीटिंग हुई जिसमें ऑपरेशन ओवरलोर्ड की नीव राखी गयी.

 

लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन के पहले मित्र राष्ट्र के सेनाओं को बेहद तैयारी और प्रशिक्षण की जरुरत थी. इसका  केंद्र बना इंग्लैंड. करीबन 10 लाख अमेरिकी सिपाही अटलांटिक महासागर  को पार करके इंग्लैंड में 11 और दूसरे देशो की फौजों के साथ सम्मिलित होक इस ऑपरेशन की तयारी में जुट गए. लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन की गोपनीयता बनाये रखना भी बेहद मुश्किल काम था , जिसको अंजाम देने के लिए एक दूसरा ऑपरेशन, ऑपरेशन बॉडीगार्ड की शुरुआत की गयी. इसके अंतर्गत बेहद प्रचिलित लेकिन उस वक़्त निलंबन झेल रहे जनरल जॉर्ज स पत्तों को बुलाया गया. जनरल GEORGE S PATTON को हिटलर पहले विश्व युद्ध से ही पहचानता था और उसके आक्रामक और निडर नेतृत्व को भी. HITLER को यकीन था मित्र देश पत्तों के नेतृत्व में ही जर्मनी के ऊपर हमला करेंगी. उसके इस भ्रम को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने हज़ारो हज़ार के संख्या में टैंक्स और सिपाहीओं को उत्तरी फ्रांस के बंदरगाह शहर PORT OF CALAIS के तरफ भेजा. ये शहर यूरोप के मुख्य  भूमि और ब्रिटैन से सबसे काम दुरी पर स्थित जर्मन नियंत्रित भाग था . लेकिन हिटलर ये नहीं जानता था की असल में जो उसे हज़ारो की संख्या में टैंक्स दिख रहे थे वो केवल टैंक्स के आकार के बड़े बड़े गुब्बारे थे और कुछ नहीं. इस पुरे युद्ध का असल नेतृत्व द्विघ्त ेसिएनहॉवर कर रहे थे.


 

अंततः 5 जून 1944 के रात करीबन 4 बजे सवेरे मित्र देशो ने मिलकर नोर्मंडी पर हमला कर दिया. हिटलर जो की ये माने बैठा था की मित्र देशो का आक्रमण PORT OF CALAIS में होगा, अपना सारा जोर उसी शहर में लगा  रखा था. हिटलर की एक विचित्र आदत ये भी थी की वो सवेरे  2 बजे से 11 बजे तक सोया करता था, और इसके बीच किसी को भी उसे नींद से उठाने की हिम्मत नहीं थी . मित्र देशो ने ये बात समझते हुए बड़े ही चतुरता से हमले का समय  प्रातः 4 बजे का चुना. पहले ही जहाँ हिटलर हमले के स्थान को लेके धोखे में था और अधिकांश सेना को उत्तरी फ्रांस में भेज रखा था, वही जब असली हमला किया गया, तो करीबन ६ घंटे तक जर्मन फौजे ये नहीं समझ पाई की इस हमले का जवाब वो कैसे दे. 7 घंटे बाद जब हिटलर की नींद टूटी तो उसे स्थिति क बारे में बताया गया, लेकिन तब तक थोड़ी देर हो चुकी थी. मित्र देशों ने इन 7 घंटे का बखूबी इस्तेमाल किया और नोर्मंडी के तट पर अपनी पकड़ बना चुके थे. नोर्मंडी में इस हार की हिटलर को भारी कीमत चुकानी पड़ी. इस जीत ने द्वितीय विश्व युद्ध की दिशा हमेशा क लिए बदल के रख दी. शीघ्र ही दोनों मोर्चो से हमले को रोक पाने में विफल होने के वजह से जर्मनी की द्वितीय विश्व यद्ध में हार हुई. जहा इटली पहले ही आत्मा समर्पण कर चूका था, हिरोशिमा में एटम बम गिराए जाने के बाद अंतिम दुशमन देश जापान ने भी अपने घुटने तक दिए और विश्व युद्ध अपने अंजाम पे पंहुचा.




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