इस आदमी को गरीबी में रखने के लिए बहुत पैसा खर्च होता है

Nanhe Sipahi | Sep 18, 2017 01:09 PM


News Image
महात्मा गाँधी, जिन्हे कई लोग स्वतंत्र भारत के जनक भी कहते हैं, अपने अहिंसा के सिधान्तो, त्याग और साधारण जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि कभी कोई भी व्यक्ति महात्मा गाँधी से उनके जीवन शैली पर सवाल पूछ सकता है. तब की कांग्रेस अध्यक्ष सरोजनी नायडू ने ये सवाल महात्मा गाँधी से पूछ लिया था.

हालाँकि सरोजनी नायडू का ये प्रश्न नकारात्मक उद्देश्य के साथ नहीं पुछा गया था. सरोजनी नायडू एक जानी मानी कवित्री थी और उन्हें महत्मा गाँधी के काफी नज़दीकी मित्रो में गिना जाता था, उन्हें उनके बेबाकी के लिए भी जाना जाता रहा है.

ये बात लगभग १९३० की है, महात्मा गाँधी साबरमती नदी के किनारे अपने आश्रम में थे जब जब सरोजनी नायडू ने उनसे प्रश्न पुछा कि “Do you know how much it costs every day to keep you in poverty?” यानि क्या आपको पता है कि आपको गरीबी में रखने के लिए प्रतिदिन कितने पैसे खर्च होते हैं. हालाँकि गाँधी जी के उत्तर के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है. पर सरोजनी नायडू के इस प्रश्न के पीछे की वजह बड़ी ही खास है.

ये घटना तब की है जब महात्मा गाँधी छुआछूत के विरोध आंदोलन कर रहे थे और अहमदाबाद के बहरी इलाको में साबरमती के समीप बसे झुग्गियों में रह रहे थे, उनके लिए एक बड़े कमरे की व्यवस्था भी की गयी थी जहां उनसे मिलने आने वाले लोग रहा करते थे, हालांकि महात्मा गाँधी ऐसा सोचते थे की उन्हें किसी सुरक्षा की जरुरत नहीं है पर उन झुग्गियों के बहार बड़ी संख्या में कांग्रेस वर्कर मौजूद थे. इतनी बड़ी संख्या में कांग्रेस वर्कर की मौजूदगी और आने जाने वाले लोगो पर काफी धन का व्यय हो रहा था. फिर ऐसा ही कुछ इसके पहले भी हुआ था, गाँधी जी ने कभी हवाई यात्रा नहीं की, वो अक्सर ट्रैन के तीसरे दर्ज़े से सफर करते थे. गांधी जी की प्रतिक्रिया अज्ञात है, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह नाराज नहीं थे, क्योंकि उन्हें पता था कि यह आरोप सच था. उन्हें पता था कि एक सरल तीसरी श्रेणी के रेलवे गाड़ी में प्रत्येक ट्रेन की यात्रा से राज्य को कितना खर्च होता है क्योंकि लाखों लोगों को देखने के लिए आते-जाते रहते थे. गाँधी जी के लिए विशेष ट्रेने चलाई जाती थीं. विशेष ट्रेनों को मैनेज करने में काफी खर्च होता था और भीड़ के कारण पूरे डिब्बे को आरक्षित करना पड़ता था. गांधी को यह पता था और उन्हें ये बात स्वीकार भी किया था.

                                                                                  


शायद इन्ही वजहों से सरोजनी नायडू ने ये सवाल महात्मा गाँधी से पूछ लिया था.कई इतिहासकारो ने इस घटना में सच्चाई भी देखी है. इसके मुताबिक न केवल ट्रैन यात्राओं में बल्कि गाँधी के किसी भी आंदोलन या कदम में काफी पैसे खर्च होते थे. गाँधी भले ही सदा जीवन जीते रहे पर उनकी प्रत्येक यात्राओं पर काफी व्यय किया गया.




News Image

इस महिला ने जनता पार्टी कि रैली में मुर्दाबाद के नारे लगवा दिए

बात सितम्बर 1977 की है जब देश में जनता पार्टी की सरकार थी, कांग्रेस और इंदिरा गाँधी को देश की ...


News Image

सनसनीख़ेज़ ख़ुलासा : न FIR में नाम, न गवाहों के बयान, पर भगत सिंह को दे दी थी फांसी

भगत सिंह मेमोरियल के अध्यक्ष इम्तियाज़ रशीद कुरैशी जो की लाहौर के रहने वाले हैं उनके द्वारा दायर एक याचिका ...


News Image

World War I: पेशाब में भीगा कपड़ा मुंह पर बांधते थे सैनिक, ये थी वजह

धरती के सीने को चीर कर रख देने वाला युद्ध था प्रथम विश्व युद्ध (WORLD WAR 1). इसकी शुरुआत 28 ...


News Image

आखिर क्यों नहीं घुस पाए मुग़ल कभी आसाम और पूर्वोत्तर के राज्यों में

हमें यकीन है अहोम राजाओं के बारे में आपने ना कभी पढ़ा होगा ना कभी सुना होगा. गलती हमारी नहीं, ...


News Image

इंदिरा की वो हांथी की यात्रा जिसने उन्हें सत्ता पर फिर से स्थापित किया

समय और सत्ता लगभग एक दूसरे के प्रयायवाची है. न समय हमेशा एक सा रहता है और न सत्ता ही ...