स्मार्टफोन यूज़र्स के लिए नयी चेतावनी

Nanhe Sipahi | Aug 30, 2017 11:08 AM


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दौर बदल रहा है, आज लगभग पूरा विश्व स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सप्प जैसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट और मोबाइल एप्प्स ने हमारे इर्द गिर्द एक वर्चुअल दुनिया बना दी है और अक्सर हम इन्ही दुनिया में उलझे भी रहते हैं. स्मार्ट फ़ोन हमारी जिंदगी का एक अहम् हिस्सा हो गया, एक ऐसा हिस्सा जिसे हम सोने के पहले और जागने के बाद कम से कम खुद से दूर नहीं करते. कई लोग तो रातों में जग जग कर भी अपना फ़ोन चेक करना नहीं भूलते. हमें हमेशा स्मार्टफोन से होने वाले फायदे के बारे में भी बताया जाता है और सरकारें भी आज कल हमें स्मार्टफोन यूज़ करने के लिए प्रोत्साहित करती है. पर हाल ही आयी AIIMS की एक रिपोर्ट ने स्मार्टफोन्स यूज़र्स के कान खड़े कर दिए हैं.




AIIMS की ओर से किए गए विश्लेषण और अनुसंधान से पता चला है कि फोन के लंबे समय तक इस्तेमाल करने से इसमें से निकलने वाली रेडिएशन हमारे दिमाग में ट्यूमर पैदा कर सकती है. AIIMS का कहना है कि अगर हमने एक ही फ़ोन का इस्तेमाल १० सालो तक किया तो ब्रेन टयूमर का खतरा और भी बढ़ जाता है.

ऐसे बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर का खतरा

कई तरह की रिसर्च से सामने आया है कि मोबाइल फोन की रेडिएशन इंसान के लिए काफी हानिकारक है। हालांकि इन रिसर्च द्वारा किसी तरह का कोई निर्णायक रूप से जवाब नहीं मिला है। AIIMS की ओर से किए गए रेडिएशन पर विश्लेषण में पता चला है कि मोबाइल के लंबे इस्तेमाल से ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। आपको बता दें इंडस्ट्री इस जोखिम को किसी तरह से कम भी नहीं कर सकती है।

ऐसा कहते हैं AIIMS के डॉक्टर

इस शोध के लेखक और एम्स में न्यूरोलॉजी प्रमुख, डॉ कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि आम तौर फ़ोन इंडस्ट्री की तरफ से फण्ड की गयी ऐसे स्टडी अच्छा रिसर्च नहीं करती और स्मार्टफोन्स से होने वाले नुक्सान के बारे में ज्यादा नहीं बताती वही सरकार द्वारा अच्छी फंडिंग कर के कराई गयी स्टडी में ये साफ़ पाया गया है, फ़ोन से निकलने वाला रेडिएशन आपके अंदर ब्रेन ट्यूमर की समस्या पैदा कर सकता है. डॉ कामेश्वर प्रसाद का ये भी कहना है की स्मार्ट फ़ोन के ज्यादा इस्तेमाल से ये खतरा और भी बढ़ जाता है.

ब्रेन ट्यूमर का खतरा 1.33 गुना बढ़ा:

इस अध्ययन में ये भी पाया गया है की अगर स्मार्टफोन १० साल पुराना है तो ट्यूमर का खतरा १.३३ फीसदी बढ़ जाता है. अगर 100 लोग ब्रेन ट्यूमर से गुजर रहे हैं तो इस रेडिएशन के बढ़ने से यह संख्या 133 हो रही है.इस अध्ययन के मुताबिक स्मार्टफोन की उम्र १० साल सिमित की गयी है.

ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए?

एम्स के न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक रेडिएशन का खतरा कम करने के लिए हमेशा हैंड्स-फ्री सिस्टम (हेडफोन, हेडसेट) और कम पावर वाले ब्लूटूथ हेडफोन्स का इस्तेमाल करना चाहिए। बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को बिना हेडफोन्स के फोन पर काफी कम बात करनी चाहिए।


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