कितना उचित है प्रेम विवाह

Nanhe Sipahi Kirti | Jun 12, 2017 08:06 PM


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दोस्तों , आज हम २१वी सदी में जी रहे हैं ।आज जहां शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश नई नई बुलंदियां छू रहा है ,वहीँ विदेशी कंपनियां हमारे देश में पैर पसार रही हैं, चाहे कोई भी क्षेत्र हो दिन प्रतिदिन हम प्रगति क मार्ग पर अग्रसर हैं । अब वो दिन भी दूर नहीं जब  हमारा देश भारत विकाशशील देशों की सूचि से विकसित देशी की सूचि में आ जाएगा । हमारे चारो तरफ डिजिटल इंडिया की बातें  हो रहीं हैं ,कैशलेस इंडिया की बातें हो रही हैं ।सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है ,कल जहाँ हम चिट्ठियां लिखा करते तह आज वहीं हम वौइस् कालिंग और वीडियो कालिंग किया करते हैं । मोर्डर्न होने की होड़ में हम बस आगे ही होना चाह रह हैं । एक साधारण कमाई करने वाला आदमी भी अपने बच्चों को अच्छे अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहता हैं ये अलग बात है की उसकी आधी कमाई स्कूल की फ़ीस भरने और बाकि की आधी दूसरे जरूरतों को पूरा करने में चली जाती है । आज हमें सब कुछ चाहिए ,ब्रांडेड कपड़े मैक्डोनल और kfc की शाम ,मूवीज,और हाँ सेल्फी को मैं कैसे भूल सकती हूँ ।मॉडर्न होने की होड़ में हम सबसे आगे हैं ।

पर क्या हमारे विचार मॉडर्न हैं ?आधुनिकता की जमीनी रूपरेखा क्या है ?आइये आज मैं आपको हमारे आधुनिक  विचारों की असलियत से अवगत कराती हूं हमारी आधुनिकता की असलियत काफी भयभीत कर देने वाली है ।



अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं ,जब मैंने उत्तर प्रदेश की एक घटना सुनी थी । घर की ही बेटी को उसके पिता और भाई ने मिलकर मार डाला । कारण सोच रहे होंगे आप? कारण बस ये था   की उसने अपने पसंद के एक लड़के से ब्याह रचाया था ।वहीँ दूसरी तरफ हरियाणा में प्रेम विवाह करने वाले जोड़ो को पुरे गांव ने बहिस्कृत कर दिया । खैर ये तो कुछ घटनाएं हैं और न जाने कितनी घटनाएं अब भी  घट रही होंगी ।और हाँ मैं आपको यह भी बता दूँ की ऐसा नहीं  है की ये हमारे गावों की बातें  हैं ,बल्कि हमारे चारोँ तरफ ये जो शिक्षित समाज और बुद्धिजीवी वर्ग जो हमें दिख रहा है - वो भी प्रेम विवाह की कड़ी निंदा करते दिखाई देते हैं ।


क्या हुआ विश्वास नहीं हो रहा ,ठीक है आप इन बुद्धिजीवी वर्गों के लोगों से पूछ कर देखिए की क्या आपके  बच्चे प्रेम विवाह करेंगे ?उनका चेहरा देख कर आपको इतना तो जरूर पता चल जायगा जैसे आपने उन्हें कोई गाली दे दी । तो क्या प्रेम विवाह एक गाली है या किसी से प्रेम करना अपराध है ।
इन सभी प्रश्नों के उत्तर से पहले हमें ये जानना होगा की प्रेम आखिर है क्या ? वैसे मेरे हिसाब से प्रेम विवाह कोई हिस्ट्री या सिविक्स का पेपर तो नहीं जो मैं इसे चंद शब्दों में परिभाषित कर पाऊं और न ही मैं अपने आप को इतना काबिल समझती हूं की प्रेम जैसे गुड़ शब्द के बारे में कुछ कहूं । प्रेम को तो बड़े बड़े विद्वान और ज्ञानी भी परिभाषित नहीं कर सकें  । फिर भी कबीर की कुछ पंक्तियाँ जो बचपन से सुनते आये  हूं वो जरूर याद हैं ......

                                         'पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भय न कोई ,
                                         ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होये ॥'



आज हर जगह पॉजिटिव थिंकिंग की बात हो रही है ।तो बस उन्ही विचारों को आगे करते हुए मैं मैंने भी प्रेम के बारे में कुछ कहा है .......'प्रेम वह विचार है जिसमे खिन व् नकारात्मक विचारों की जगह नहीं होती है प्रेम अपने आप में सम्पूर्ण और सकारात्मक विचार है ।'
                                                         


प्रेम विवाह 
; जब कोई इंसान अपनी स्वेक्षा से किसी को पुरे मन से अपनाता है और उसक साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहता है  और यु कहें की विवाह करना चाहता है उस वक्त बहुत काम माता पिता ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों के विवाह सम्बन्धी निर्णय को खुले दिल से अपनाते हैं ।और इनमे से कुछ जो अपनाते भी हैं वो पूर्ण विवस्ता और अनिक्षा क साथ । प्रेम विवाह को अस्वीकार करने के बहुत से कारण  हैं । कहीं अंतर्जातीय ,तो कहीं अंतरधर्मीय ,कहीं लड़की उच्च कुल की तो कहीं लड़का दलित वर्ग का ।परन्तु इन सब से ऊपर जहां सब कुछ सामान होता है वहां, जाती भी एक, धर्म भी एक और कुल भी सामान ।तब वहां क्यों आती हैं प्रेम विवाह में दिक्कतें ?वहां पर आता है समाज का झूठा अहंकार । माता पिता अपने बच्चों द्वारा जीवनसाथी चुनने को अपना अपमान समझते हैं ।


अक्सर मैंने माता पिता को अपने बच्चों से ये कहते सुना है की इसी दिन के लिए तुम्हे पाला था ,इसी दिन के लिए इतने दिक्ततें की थी । 
आपको लग रहा होगा की मैं माता पिता के बलिदानो पे ऊँगली उठा रही हूं पर मेरा कहने का मतलब ये बिलकुल नहीं है माता पिता की जगह तो कोई भी नहीं ले सकता पर मन में जो सवाल है उसके बारे में आपको बताना चाह रही हूं ।मैंने बचपन से सुना है की प्रेम निस्वार्थ भावना है पर ये कैसी निस्वार्थ भावना है जो अपने ही बच्चों से किये गए प्रेम के बदले उनका प्रेम मांगती हैं |

प्रेम विवाह करने वाले युवक युवतियों  में मैंने देखा है ,वो स्वयं निर्णय लेने वाले होते हैं उनमे स्वतंत्र चेतना होती है और अपना निर्णय स्वयं लेने के कारण थोड़े स्वाभिमानी होते हैं । थोड़े आधुनिक होते हैं और एक स्तर से निचे जा कर वो समझौता नहीं कर सकते । तो क्या प्रेम विवाह में सबकुछ अच्छा ही होता है नहीं हर विवाह की तरह प्रेम विवाह में भी कुछ परेशानियां होती हैं प्रेम विवाह चूँकि खुद की मर्जी से किया जाता है इसलिए परिस्थितियां काफी विपरीत रहती हैं ।चूँकि शादी अलग धर्म और जाती में होती है तो उस रूप में परिवार क रीती रिवाजों को अपनाने में खास कर लड़की को बहुत तकलीफ उठाने पड़ते हैं और अपने आपको परिवार के सदस्यों के सामने साबित भी करना पडता है ।प्रेम विवाह करने वाले लोगों को समाज का दर थोड़ा काम होता है ,इसलिए वो लोगो की परवाह काम ही करते हैं ।भावनातल पे थोड़े विकसित होते हैं और अपनी जिम्मेवारियां खुद ही उठाते हैं ।

प्रेम विवाह गलत नहीं हैं परन्तु आधुनिक परिवेश और खुला वातावरण में हमारी पीढ़ी थोड़ी भटक रही है और जहाँ प्रेम विवाह में लोग खुद को असफल पाते हैं खुद को अवसाद और आत्महत्या से ग्रसित कर लेते हैं ।


अर्रंगे मर्रिज  - आइये अब बातें करते हैं हमारे समाज में सबसे ज्यादा लोकप्रिय विवाह क बारे में । Arrange marraige यह एक ऐसा विवाह होता है जिसमे शादी माता पिता और रिश्तेदार मिलके तय करते हैं इसमें किसी परिचित और सम्बन्धी द्वारा लड़का या लड़की बताये जाते हैं और सर्वसहमति से विवाह किया जाता है । हमारे शिक्षित और बुद्धिजीवी वर्ग में इस विवाह को काफी ऊँचा स्थान  दिया गया है और इस प्रकार का विवाह करने वाले बच्चों को भी काफी संस्कारी माना जाता है । Arrange marraige में शादी चुकी एक धर्म ,एक जाती और सामान कुल में की जाती है इसलिए एडजस्टमेंट की प्रॉब्लम थोड़ी काम होती है और ऐसा भी कहा जाता है की इस तरह के विवाह में आपसी मतभेद क शिकार जोड़े को परिवार का सहयोग भी मिलता है । चूँकि ये विवाह परिवार की सहमति से होती है इसलिए विवाह के समय परिवार में हर्ष और उल्लास का माहौल रहता है ।

परन्तु यह भी बहुत बड़ा सच है की हमारे समाज में दहेज़ प्रथा को बढ़ने में arrange marraige का बहुत बड़ा हाथ रहा है ।अर्रंगे मर्रिज में सबसे बुरा हाल लड़की का होता है । लड़के से तो लड़की के बारे में सब कुछ बता दिया जाता है और लड़का लड़की से मिलकर यह निर्णय भी ले लेता है की वो उससे शादी करेगा या नहीं पर क्या एक लड़की से उसकी मर्जी पूछी जाती है ? आप अपने चारोँ तरफ नजर घुमा के देखिए ...या फिर खुद से ये सवाल कीजिये क्या  आपसे पूछा गया था की तुम्हे ये लड़का पसंद है या नहीं । जिस प्रकार एक लड़का लड़की से हजारों सवाल करता है ,क्या एक लड़की को ये अधिकार नहीं मिलना चाहिए की वो लड़के से उसके शिक्षा दीक्षा ,परिवार के रहन सहन और पारिवारिक महल के बारे में सवाल करे ? क्योंकि लड़के को लड़की के घर आ कर नहीं रहना है बल्कि लड़की को लड़के के घर जा के रहना है 
।और यदि लड़की लड़के के बारे में कुछ कहती भी है तो कहा जाता है' बेटी सब कुछ तो नहीं मिलता थोड़ा एडजस्ट  तो करना पडता है ।

अब इसी बात पे मुझे एक घटना याद आ रही है मेरे एक रिश्तेदार में एक लड़की की शादी थी लड़के वालों ने दहेज़ में कुछ कॅश की मांग की थी ।लड़की के पिता उन्हें पैसे  देने जा रहे थे और साथ में एक और व्यक्ति को ले कर जा रहे थे,मैंने भी पूछ दिया की आप इन व्यक्ति को साथ ले कर क्यू  जा रहे हैं  ।जवाब ऐसा मिला की मैं क्या कहूं ,'बेटी ,इतने पैसे देने जा रहा हूं एक गवाह तो रखूँगा न ...कल को लड़के वाले माना कर देंगे तो की मैंने आपसे पैसे नहीं लिए हैं '।मैं दंग थी ये किस तरह का विवाह है ,जिस परिवार की नैतिकता पर आपको शक है ,उस परिवार में आप अपनी बेटी कैसे दे सकते हैं ? क्या आपकी बेटी से ज्यादा वो द्रव्य महत्वपूर्ण हैं ,जहां आप पैसे देने के लिए एक इंसान को ले के जा रहें हैं वहां आपकी बेटी अकेले जा कर रहेगी .....ये कैसा समाज है और ये विवाह का कैसा स्वरुप है .....ये मेरी समझ से तो परे है । 


इस तरह के विवाह में एक बात और कही जाती है की यदि किसी प्रकार का आपसी मतभेद होता है तो पारिवारिक सहयोग मिलता है ,पर क्या ये वास्तविकता है ।नहीं ,ऐसे मामलों में परिवार वालों को बस यही कहते सुना है की छोटे छोटे मतभेद खुद ही सुलझाना चाहिए । थोड़ा एडजस्ट तो करना पड़ेगा | पर एडजस्टमेंट की सीमा क्या है ? ये kaun तय करता है ,मानसिक  शोषण  या शारीरिक  शोषण  ,कहाँ तक  है इसकी  सीमा ?
                                          आपलोगो को लग रहा होगा की मैं Arrange Marriage के खिलाफ हूँ,पर ऐसा बिलकुल नहीं हैं । मैं किसी भी प्रकार के विवाह के न तो पक्ष में हूँ और न ही विपक्ष में । मेरा कहने का तात्पर्य  बस ये है की विवाह एक बहुत ही सुन्दर  बंधन  है ,और इसको सफल सिर्फ दो  इंसान ही बना  सकते हैं । न की विवाह करने के तरीके । विवाह किसी भी प्रकार का हो यदि पति पत्नी  के बीच बंधन मजबूत हो तब वह शादी स्वयं ही फलती फूलती है 


आज हर जगह women empowerment की बातें हो रही हैं । तो आइये हम भी women empowerment की तरफ अपना पहला  कदम  बढ़ाते  हैं और अपने घर की बेटियों को उनका जीवनसाथी चुनने का अधिकार खुद देते हैं ,चाहे वो किसी भी प्रकार का विवाह हो | यदि आपके घर की बेटी ने आपके द्वारा चुने हुए लड़के को माना कर दिया तो उसे सम्मानपूर्वक  स्वीकार करे । न की उसे अपने ego से जोड़े और जिस दिन हम ऐसा कर पाएंगे उस दिन हम सही अर्थों में आधुनिक हो जाएंगे॥




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