भगवान शिव की कहानी

Nanhe Sipahi | Dec 11, 2017 02:12 PM


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दैत्यों का स्वभाव तो सदैब से शक्तिसम्पन्न होते ही देवतावों और मनुष्यो को पीड़ित  करना रहा है |

ब्रह्मा जी से वर पाने के बाद तरकसुर के ३ पुत्रों ने मयदानव के द्वारा ३ नगर बनवाए | उसमे एक सोने का एक चांदी का एक लोहे का था | ये नगर आकाश में इधर उधर घूम सकते थे | इसमें बढे बढे भवन थे बाग़ , सड़के थी | करोडो दानव उसमे निवास करते | सुख  सुविधा तो उन नगरों में इतनी थी की कोई भी दवन जो भी इच्छा करता उसे वह  मिल जाता | इतना ही नहीं तरकसुर के पुत्र ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वर मांगकर मुर्दो को भी जीवित कर देने वाली बाबड़ी बनवाई | कोई भी दानव अगर मर जाता तो उसे उस बाबड़ी में ले जाया जाता | वह पुनः जीवित हो जाता और पहले से ज़्यदा शक्तिशाली हो जाता | फिर क्या था दानव निर्भय होकर देवतओं को डराने लगे | वे जगह जगह देवतओं को भगाकर इधर उधर विचरने लगे | वे मर्यादाहीन दनाव देवतओं के उद्यानों को तहस नहस करदेते और ऋषियों के पवित्र आश्रमों को भी नष्ट कर देते | इनके अत्याचारों से चारो तरफ हाहाकार मच गया |


इस प्रकार जब सब लोक पीड़ित हो गए तो साभी देवता  इंद्रा के साथ मिलकर उन नगरों पर प्रहार करने लगे | किन्तु बर्ह्मा जी के वर के प्रभाव से सबअसुर पुनः जीवित हो जाते थे |


सभी देवता मिलकर बह्मा जी के पास गए | बह्मा जी ने देवतओं को बताया की भगवान् शिव (lord Shiva )के अलावा आपको कोई भी इस समस्या से नहीं निकाल सकता | तदन्तर बर्ह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवता भगवान् शिव  के पास गए | भगवान् शिव (lord Shiva )शरनपन्नो को अभयदान देने वाले है . तेजराशी पारवती जी के पति भगवान् शिव के दर्शन पाकर सभी देवतओं ने सर झुककर प्रणाम किया | भगवान् शिव  ने आशीर्वाद स्वरुप कहा कहिये आप सब की क्या इच्छा है |

भगवान् शिव की आज्ञा पाकर देवतओं ने भगवान् शिवकी स्तुति की और कहा हम मन वाणी , कर्म से आपकी शरण में हैं आप हमपर कृपा करे | भगवान् शिव  ने प्रसन्न होकर कहा आप सब भय रहित होकर कहिये मैं आपका क्या कार्य करू |


इस प्रकार जब महादेव जी ने देवतओं को अभयदान दे दिया तब बर्ह्मा जी ने हाथ जोड़कर कहा- सर्वेशर आपकी कृपा से प्रजापति के पद पर प्रतिष्ठित होकर मैंने दानवो को एक वर दे दिया  था | जिससे उन्होंने सब मर्यादायों को तोड़ दिया आपके सिवा  उनका कोई वध नहीं कर सकता |


तब भगवान् शिव ने कहा – देवताओं ! में धनुष – बाण धारण करके रथ में सवार हो उनके वध शीध्र ही करूँगा | देवतागण संतुष्ट होकर भगवान् शिव की जय जय कार करने लगे .


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