जब राम का फेंका रामसेतु का वो पत्थर डूब गया |

Nanahe Sipahi | Jun 20, 2017 12:06 PM


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बात उन दिनों की है जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम माता सीता की खोज में भटकते भटकते लंका तट तक जा पहुंचे | जब राम सेना को ये ज्ञात हुआ की माता सीता को रावण हर ले गया है और माता सीता लंका में है तब निश्चय किया गया की लंका पर चढ़ाई करने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं है | पर लंका तक पहुंचा कैसे जाये ये एक विकट समस्या थी | अथाह समुद्र के उस पार लंका तक पहुंचना लगभग असंभव था | तय किया गया समुन्दर के ऊपर सेतु निर्माण किया जाये | नल नील और बानर सेना ने पूल निर्माण का काम शुरू किया | कहते हैं कि यह विशाल पुल वानर सेना द्वारा केवल 5 दिनों में ही तैयार कर लिया गया था। कहते हैं कि निर्माण पूर्ण होने के बाद इस पुल की लम्बाई 30 किलोमीटर और चौड़ाई 3 किलोमीटर थी।


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जब इस पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो बानरों ने राम नाम लिखा पत्थर समंदर में फेकना शुरू किया पर आश्चर्य की बात ये थी की एक भी पत्थर डूब नही रहा था | सब समंदर पर तैरने लगते थे | बड़ी ही विचत्र स्तिथि को देख श्री राम ने एक पत्थर उठा कर समंदर में फेंका और ये क्या वो पत्थर डूब गया | श्री राम व्याकुल हो गए की मेरा नाम लिखा पत्थर समंदर में तैरने लगता है और जब मैं खुद ही पत्थर डालता हूँ तो वो डूब जाता है | श्री राम जब सोच में डूबे थे तो हनुमान उन्हें दूर से देख रहे थे |




श्री राम की इस स्तिथि को देख महाबली हनुमान राम के पास गए और पुछा हे प्रभु आप किस ध्यान में डूबे है आपकी व्याकुलता का रहस्य क्या है | इसपर श्री राम ने कहा हे अंजनी पुत्र मैं इस सोच में डूबा हूँ की ये बानर मेरा नाम लिख लिख कर पत्थर समुद्र में डाल रहे हैं और और ये पत्थर तैरने लगते हैं और जब मैंने खुद ही ये पत्थर समुद्र में डाला तो वो डूब गया | ऐसा क्यों ? हनुमान ने हाँथ जोड़ प्रभु को कहा कि हे प्रभु इन पत्थरो पर राम नाम लिखा होने से आप इन पत्थरो को डूबने से बचा रहे है पर जब आप स्वयं ही किसी का त्याग कर दे वो कैसे जीवित रह सकता है | अपने पथरो को फेंक कर उसका त्याग कर दिया उसे तो डूबना ही था |

कमेंट में लिखिए जय श्री राम और और इस कथा को दूर दूर तक पहुचाइए |

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