ये भी बीजेपी

Nanhe Sipahi | Aug 06, 2017 01:08 PM


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2014 में हुए आम चुनाव का भारत की राजनीती में बड़ा असर रहेगा. पहली बार गैर कोंग्रेसी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आयी और इस अद्भुत घटना के और इस अविश्मरणीय सफलता का सारा श्रेय हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है. मोदी जी ने भी खुद को प्रधानसेवक सेवक बताया और कहा कि पाने किये गए सरे वादों को पूरा करने में मोदी सरकार कोई कसार बाकि नहीं रखेगी. अब 2019 ने दस्तक दे दी है और समय आ गया है ये समझे का मोदी सरकार के किये गए वादों और दावों में कितनी सच्चाई है. बीजेपी के कथनी और करनी में बहुत फर्क रहा है, गौर से देखें तो बीजेपी कांग्रेस का विकल्प जरूर बानी है पर सत्ता में इतने बड़े बहुमत से आने के बाद बीजेपी भी वही कर रहे है जो कांग्रेस करती रही है. सच कहे तो जिस प्रकार उत्तर-पूर्व में बीजेपी ने कब्ज़ा किया है वो दूसरे कांग्रेस की कहानी ही है, आइये हम मोदी सरकार की विफलताओं पर एक नज़र डालते हैं -



2014 के चुनाव प्रचार की कड़ी में मोदी सरकार ने रोजगार बढ़ने के साधनो और तरीको की बात की थी, ये भी कहा था की मोदी सरकार अगर सत्ता में आयी तो वो हर साल 1 करोड़ नौकरियां पैदा करेंगे. पर ऐसा कुछ होता दिखा नहीं. उलटे नौकरियां कम हो गयी. अभी हाल ही में आयी सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल में नौकरियों की स्थिति काफी बुरी है. फर्स्ट पोस्ट पर प्रकाशित ये रिपोर्ट आपको जरूर पढ़नी चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का नरा जरूर दे दिया है पर हकीकत ये है की देश का बाजार मर रहा है ऐसे में जो बाजार की स्तिथि है ऐसे में नए नौकरिया तो दूर की बात है वर्तन स्थति बनी रहे तो बड़ी बात होगी. फर्स्ट पोस्ट की ये रिपोर्ट आप यहाँ से पढ़ सकते हैं - http://www.firstpost.com/business/where-are-the-jobs-mr-modi-2731002.html




2014 आम चुनावो का एक सबसे बड़ा मुद्दा था कला धन और भ्रष्टाचार. हालाँकि मोदी सरकार पर परोक्ष रूप से भरष्टाचार के आरोप नहीं लगे और इस मामले में सरकार को १०० में से १०० अंक मिलने चाहिए किन्तु फोर्बेस पत्रिका मार्च अंक में प्रकाशित एक रिपोर्ट ने काफी सुर्खिया बटोरी हैं. हमारा देश करप्शन वाले मुद्दे में अव्वल है, फोर्बेस ने जो सबसे ज्यादा भ्रष्ट 48 एशियाई देशो की सूचि तैयार की है उस सूची में भारत पहले स्थान पर है, इस दौर में मोदी सरकार ने नोटेबंदी करने का बड़ा फैसला जरूर ले लिया पर स्थति में ज्यादा सुधर होता नहीं दिख रहा है, छोटे स्तर पर अब भी करप्शन आसानी से पकड़ा जा सकता है, जन लोकपाल वाला आंदोलन भी कुंद पद गया है और विदेशो से लाये जाने वाले काले धन पर तो BJP के करता धर्ता अमित साह ने पहले ही कह दिया है की वो एक चुनावी जुमला था. फोर्बेस की वो रिपोर्ट आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं https://www.forbes.com/sites/tanvigupta/2017/03/13/asias-five-most-corrupt-countries/


गंगा की सफाई वाला बड़ा मुद्दा भी लगभग ठन्डे बस्ते में दाल दिया गया है, हालाँकि मोदी सरकार ने गंगा की सफाई के लिए अलग मंत्रालय भी बनाया और उमा भारती को गंगा की सफाई की जिम्मेवारी भी दी गयी पर कुछ खास बदलाव नहीं आया है, वैसे ये मुद्दा भारतीय प्रवृति से भी जुड़ा हुआ है पर सच ये भी है कि अगर मोदी जी के शब्दों में मनरेगा कांग्रेस की विफलताओं का स्मारक है तो गंगा भी BJP के हवा निकाल रही है. नमामि गंगे के अंतर्गत ३००० करोड़ खर्च किये जा चुके हैं, खुद मोदी जी की लोकसभा सीट पर गंगा की हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है, न कासी क्वेटा बन पायी और न गंगा की सफाई ही हो पायी जबकि कासी में मोदी जी को खुद गंगा मैया ने बुलाया था.

हलाकि विदेश सम्बन्धो में भारत ने नए युग में प्रवेश किया और पहले की सरकारों के अपेक्षा मोदी सरकार को विशेष सफलताएं भी मिली है पर चीन के मुद्दे पर हम कंफ्यूज ही दिखाई दिए, हम ये तय ही नहीं कर पाए की चीन हमारा दोस्त है की दुश्मन कभी चीनी नेता के साथ मोदी गर्मजोशी से मिले तो कभी भारत सरकार चीनियों को आँखें दिखती नज़र आयी. हालाँकि शुष्मा जी अभी हल में ही सदन के अंदर चीनियों के साथ अपने संबधो पर एक ऎतिहासिक भाषण दिया पर सच ये हैं बीते ३ सालो में चीन पर हमरा रवैया ढुलमुल ही रहा है. BJP के बड़े लोग चीनी वस्तुओ का बहिष्कार की बातें करते नज़र तो आये पर करते बिलकुल भी नहीं. खुद BJP की महाराष्ट्र की सरकार ने चीनी कंपनी को नागपुर मेट्रो का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया. अब ये तो भ्रमित होने वाली ही स्थिति है. इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ये खबर ज्यादा प्रकाश डाल पायेगी - http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/statue-of-unity-to-be-made-in-china-gujarat-govt-says-its-contractors-call/




पंजाब की हार एक बड़ी हार है क्यों की पंजाब ने बीजेपी और अकाली के गठबंधन को नकार दिया और मुद्दा भी ऐसा की बीजेपी जिसपर बात नहीं करना चाहेगी. पंजाब में नशा एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया खुद बीजेपी और अकालियों की सरकार पर इसे बढ़ावा देने के आरोप लगे.

रेलवे के मुद्दे पर भी मोदी सरकार ज्यादा कुछ खास नहीं कर पायी है. रेलवे की स्थिति जस की तस बनी हुई है और तो और हाल ही में आयी कैग की रिपोर्ट ने ताबूत में आखिरी कील भी ठोक दी है. कैग का कहना है की रेलवे में जो खाना परोसा जा रहा है वो इंसानो के खाने लायक नहीं है ऐसे में रेलमंत्री सुरेश प्रभु को जवाब देते नहीं बन पड़ा. और तो और टिकट बुकिंग से दलालों की भूमिका भी दूर करने में सरकार असफल ही रही. सरकार ने रेलवे बजट को भले ही ख़तम कर दिया पर यात्रियों की मुश्किलों को ख़तम करने में अभी टाइम लगने वाला है

गोवा में सरकार बनाने के लिए मनोहर परिकर को गोवा वापिस भेज तो दिया गया पर देश को अभी भी फुल टाइम डिफेन्स मिनिस्टर का इंतज़ार है. फ़िलहाल ये मंत्रालय देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली ही संभाल रहे है पर सवाल उठना लाज़मी है की इतने बड़े देश की रक्षा के लिए क्या हमें एक फुल टाइम डिफेन्स मिनिस्टर नहीं चाहिए.




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