मुस्लिम देश क्यों डरते हैं 80 लाख की आबादी वाले इज़राइल से। भारत इज़राइल से क्या सीख सकता है?

Nanhe Sipahi | Nov 16, 2017 09:11 AM


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अगर आप इज़राइल के मैप पर नजर डाले तो यह छोटा सा देश चारों ओर से इस्लामिक देशो से घिरा हुआ है। इस्लामिक देश और मुसलमान इज़राइल को कैसे देखते हैं यह तो सब जानते ही हैं।

अब आप आईएसआईएस को ही देख लीजिए जिसने पूरे अरब में तबाही मचा रखी है, जो लोगों को बेरहमी से मार रहे हैं। इज़राइल सीरिया का पड़ोसी देश ही है लेकिन आज तक आईएसआईएस ने इज़राइल पर एक भी गोली नहीं चलाई और ना ही कोई ऐसा करने की धमकी दी क्योंकि आईएसआईएस भी जानता है कि इज़राइल को छेड़ना मतलब अपनी मौत को दावत देने जैसा है।

इज़राइल के अंदर रहने वाला हर व्यक्ति अपने देश से बेहद प्यार करता है और वह सही और गलत को अच्छी तरह समझते हैं। इज़राइल में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो अपनी देश की सुरक्षा को कमजोर करके बेतुकी मानवाधिकारों वाली बातें करता हो।

इज़राइल का बेखोफ रुतबा इज़राइल का यह रुतबा उसके बनने की कहानी से ही पता लग जाता है। हिटलर से जान बचाने के लिए जब यहूदी एक स्थान पर पहुंचे तो वहां पर उन्होंने इजरायल बनाया। अरब देश में रहने वाले मुसलमानों ने पहली बार जब इज़राइल पर जब हमला किया तो उस समय अभी इज़राइल अरब देशों के मुकाबले में कमजोर ही था। उनके पास कोई भी बड़ी सेना नहीं थी, ना ही असला था, ना फौज जिससे वह दूसरे देशों को डरा सके।

लेकिन इज़राइल के पास एक ऐसी शक्ति थी जिससे उन्होंने 1948 में अरब  को युद्ध में हरा दिया। तब से लेकर आज के दिन तक अरब देशों ने इज़राइल के साथ 6 बार युद्ध लड़ा है और सभी युद्धों में अरब देशों को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

अगर हम केवल आंकड़ों की बात करें तो अरब और इज़राइल के बीच हुए युद्ध में इज़राइल के केवल 22000 सैनिक शहीद हुए जबकि अरब देशों के कुल 91,000 से अधिक सैनिक शहीद हो गए।



अगर आप इज़राइल का नक्शा देखें तो आपको मालूम पड़ेगा कि इज़राइल चारों ओर से मुस्लिम देशों से घिरा हुआ है फिर भी उनमें से किसी भी देश में इतनी शक्ति नहीं है कि वह इज़राइल को दबा सके। इजराइल की ताकत उनके लोग ही हैं जो अपने देश से अधिक प्यार करते हैं। इज़राइल कभी भी किसी के ऊपर पहले हमला नहीं करता किंतु अगर कोई उसे छेड़ दे तो वह चुप भी नहीं रहता। उसका जवाब हमेशा ही भयानक रहता है।

इजराइल की मोसाद इज़राइल की यह एक ऐसी ताकतवर टुकड़ी है जिससे सभी आतंकवादियों के मुखिया और आतंकवादि देशों के नेता कांप जाते हैं। जर्मनी में ओलंपिक के दौरान जब जिहादी तत्वों ने इज़राइल के खिलाड़ियों की हत्या कर दी और हत्या करने के बाद वह कुछ मुस्लिम देशों में जाकर छुप गए, यह सोचकर कि वह अब सुरक्षित है। वहां जिहादी तत्वों की संख्या सैंकड़ों में थी, किंतु इज़राइल ने बदला लेने की ठान ली थी। मोसाद के 30 सैनिक उन मुस्लिम देशों में घुसे और उन जिहादी तत्वों को मार गिरा कर वापिस लौट आए। इस पूरे ऑपरेशन में मोसाद का केवल एक जवान ही शहीद हुआ।

आप यही  से अंदाजा लगा सकते हैं कि देश केवल बड़ा होने से कुछ नहीं होता, देश जमीन से नहीं वहां रहने वाले देशवासियों से बनता है। अगर देशवासी मजबूत होंगे, दृढ़ निश्चय वाले होंगे तो देश भी सबसे अधिक उत्तम होगा। किसी की भी मजाल नहीं होगी कि वह उस देश पर नजर उठाकर देख सके।

इज़राइल अपने दुश्मनों को कभी माफ नहीं करता। वक्त चाहे कितना भी बीत जाए वह अपने दुश्मनों के पीछे लगा रहता है और उन्हें ढूंढ कर, उन्हें उनकी बिल से बाहर निकालकर इज़राइल उन्हें अपराध का दंड अवश्य देता है। एक किस्सा है जब कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इज़राइल की कुछ नागरिकों को मार डाला और उन्हें मारने के बाद वह अपना नाम और हुलिया बदलकर अलग-अलग देशों में जाकर रहने लगे। लेकिन इजरायल ने उन्हें 25 साल बाद दक्षिण अमेरिका के एक होटल में ढूंढ निकाला और उन्हें मार दिया।

भारत को भी इज़राइल से ही सीखने की आवश्यकता है भारत और इज़राइल की परेशानी एक जैसी ही है वह भी चारों तरफ से दुश्मनों से घिरा हुए हैं और यहां भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। वहां इज़राइल और फलस्तीन हैं | वह फिलिस्तीन जो इज़राइल का हिस्सा है ठीक उसी तरह जिस तरह पाकिस्तान हिंदुस्तान का हिस्सा था। आज से संबंध फिलिस्तीन और इजराइल में हैं ऐसे ही कुछ संबंध भारत और पाकिस्तान के भी हैं, लेकिन इज़राइल और भारत के लोगों में जमीन आसमान का अंतर है। भारत की जमीन में बुद्धिजीवी कुछ अधिक ही पैदा होते हैं जो भारत की भलाई कम उसके दुश्मनों की बढ़ोतरी अधिक चाहता है। इस देश के नेता लोगों का तो पता नहीं किंतु भारत में रहने वाले नागरिकों, देश प्रेमियों, राष्ट्रवादियों के जज़्बे को हमें फिर से जगाना होगा। कृपया कर इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि हमारे देश की युवा पीढ़ी इससे प्रेरणा ले सके।







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