तो क्या महात्मा गाँधी ने भारत को आज़ादी नही दिलाई

Nanhe Sipahi Prashant | Jun 08, 2017 12:06 AM


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एक साक्षात्कार में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री Sir Clement Etlee से पुछा गया की भारत की आजादी के पीछे गाँधी का कितना योगदान है तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया "शून्य" . "दे दी हमें आज़ादी बिना खडग बिना ढाल". बचपन से सुनते आ रहे इन पंक्तियों ने हमेशा से मन में खास जगह बना के रखीं  है. लेकिन क्या पर क्या सही में केवल गाँधी, नेहरू, भगत सिंह और अन्य देशभक्तो ने ही हमें आज़ादी दिलाई ? हमारे किताबो ने हमारे स्वतन्रता सेनानिओ के बलिदानो को काफी गौरवान्वित करके रखा है और हम समझते है कि ये सही भी है पर इसके साथ हे हमारे टेक्स्ट बुक्स से कई ऐसे बातें छुपाये गई जिसे एक डेमोक्रेटिक और पारदर्शी देश होने के नाते हमें जानना चलिए , लेकिन आजादी के समय पे होने वाले अंतर राष्ट्रीय घटना को समझेंगे तो मालूम चलता है कि भारत की आजादी के पीछे कुछ और भी कारण थे जो ज्यादा प्रभावी थे. 1947 में जब ब्रिटिशों ने भारत में अपने उपनिवेश को ख़त्म करने का निर्णय किया तो दुनिया बेहद ही व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी. 1945 में नागासाकी और हिरोशिमा पे एटम बम के प्रयोग के बाद द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ था. जर्मनी इटली और जापान की हार हुई और मित्र देशो को सफलता मिली थी. इस सफलता के बाद भी, लम्बे युद्धं ने मित्र देशो की आर्थिक स्थिति को काफी बिगाड़ के रख दिया था. वस्तुतः इंग्लैंड आर्थिक मंदी के दौर में था , ब्रिटेन की ही अगर बात करे तो सबसे ज्यादा हानि उसे ही उठानी पड़ी थी, जर्मनी के लगातार हमलो ने ब्रिटेन को  आर्थिक रूप से काफी क्षति पहुचायी थी. लम्बे युद्ध के बाद ब्रिटेन अब खुद के अंदरूनी हालत को सुधरने में लगा था. वस्तुतः इंग्लैंड उस दौर में बहुत ही बड़ी आर्थिक मंदी से भी गुजर रहा था | ब्रिटेन कि हालत अब वैसी नही रह गयी थी अपने उपनिवेशों को संभाल के रखे और न इतने बड़ी फौज का खर्च उठा सके.


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद देश के आतंरिक स्थिति को देखे तो सुभाष चंद्र बोस की INA का भी काफी योगदान देखने को मिलता है. द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की मदद से INA खुद को काफी मजबूत बना चूका था. लेकिन जापान की हार के बाद भी अकेले  INA के  द्वारा नागालैंड की विजय ने देश के फ़ौजिओं का मनोबल बहोत ऊंचा कर दिया. नागालैंड के जीत INA ने अपने बलबूते पे पायी थी जिसमें जापान की कोई मदद नहीं थी. इससे सिपाहीओं में ये सन्देश गया की जब INA के  लोग अंग्रेजो से लड़ के  जीत सकते है तो फिर उनके पास तो कई सारे बेहतर हथियार है, और उनकी संख्या भी काफी ज्यादा है. ये सब कारण बना 1945 के फौजी विद्रोह का.


ब्रिटैन की फ़ौज इस विद्रोह को रोकने क लिए बिलकुल तैयार नहीं था. एक बात और भी थी की तब से १०० साल पहले जब आपसी संपर्क ना के बराबर होते हुए 1857 में ही इतने बड़े पैमाने पे विद्रोह किया जा चूका था, तो अब जबकि फ़ौज बिलकुल अभी अभी युद्ध से लड़ के लौटी है, प्रशिक्षण उनके जेहन में बैठा है, युद्ध कला में निपुण है, और आपसे संपर्क पहले से काफी अच्छा है, तो ऐसी फ़ौज अब अगर विद्रोह करती है तो उसको रोक पाना असंभव के बराबर होता.


इस तरह से अगर देखा जाए तो ब्रिटिश उपनिवेश पुरे दिनया में काफी कमजोर हो रहे थे और एक एक करके कई सारे देश आजाद हुए . 1947 में भारत, पाकिस्तान, बर्मा, श्रीलंका, इजराइल, जॉर्डन में ब्रिटिश उपनिवेश का अंत हुआ और अगले 15 सालों में मतलब 1965 तक 15-20 और देश आजाद हुए. गौर करने की बात ये भी है की एक साक्षात्कार में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री Sir Clement Etlee से पुछा गया की भारत की आजादी के पीछे गाँधी का कितना योगदान है तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया "शुन्य" .



तो अगर अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखे तो मालूम चलता है की विश्व युद्ध के परिणामो के वजह से भारत में ब्रिटिश उपनिवेश का अंत हुआ था, ना की केवल बापू के सत्याग्रह से और ना ही केवल भगत सिंह के आंदोलन से. हालाकिं इनके इनके योगदान को कभी नाकारा नहीं जा सकता और भारत का हर व्यक्ति खुद को ऋणी समझता है, इनके बलिदान का और इनके त्याग का.



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