हम हमलो की कठोर शब्दों में निंदा करते रहेंगे, यही हमारा काम है

Nanhe Sipahi | Jul 11, 2017 01:07 AM


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हम एक बार फिर से हमले की कठोर शब्दो में निंदा करते हैं, बाकि सारे काम बदस्तूर जारी रहेंगे. अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद हम उम्मीद करते हैं देश का गृहमंत्रालय यही बयान देगा. इंतज़ार करिये वही रटा रटाया बयान आने वाले हैं. भारत चुप नहीं बैठेगा, भारत कमजोर नहीं है. हम इस हमलो की कठोर शब्दों में निंदा करते हैं.

याद कीजिये वो मार्च अप्रैल का महीना, इंडिया टीवी पर रजत शर्मा देश के भावी प्रधानमंत्री का इंटरव्यू कर रहे थे, मोदी जी बेबाकी से बड़े बड़े जुमले मारे जा रहे थे. वो बता रहे थे की पाकिस्तान को उसी की भाषा में कैसे जवाब दिया जाएगा. कैसे दाऊद को पकड़ने के लिए अमेरिकियों की तर्ज़ पर ऑपरेशन अंजाम देना चाहिए. वो बता रहे थे की कैसे देश को तय करना पड़ेगा की पाकिस्तान हमारा दोस्त है की दुश्मन है. आज जब दिल्ली में मोदी सरकार ने ३ साल पुरे कर लिए है तब भी देश वही खड़ा है. देश आज भी तय नहीं कर पाया की पाकिस्तान के साथ व्यापार करना है या वॉर. ३ साल पुरे होने के बाद भी देश अब भी उस मोदी का इंतज़ार कर रहा है जिसने देश से आतंकवाद की जड़ो को नष्ट करने का वचन दिया था. उरी से पठानकोट, कश्मीर और अब अमरनाथ देश को कितना सहना है ये अब मोदी सरकार को बताना पड़ेगा. अब समय आ गया है की सरकार ये बताये की उनके पास कोई प्लान है भी ऐसी घटनाओ को रोकने के लिए. या हम ये मान ले की ईतने विशाल देश में ये क्षमता नहीं है की देश अपने नागरिको को अपने सैनिको को सुरक्षा प्रदान कर सकता है,



आतंकी हमले में मरने वाले सभी मृतक गुजरात के हैं. फोटो-एएनआई


क्या हम शुतुरमुर्ग की तरह सर ज़मीन में धसाये यही सोचते रहेंगे की मोदी सरकार अच्छा कर रही है. हमें ये समझना पड़ेगा की देश व्यक्ति से ऊपर है. हमें ये सोचना पड़ेगा की बीते ३ सालो में देश की सरकार ने ऎसे क्या कदम उठाये हैं जिससे देश में ऐसी घटनाओ की पुनरावृति न हो. उत्तर आप सबके पास है. हमारे बॉर्डर जैसे बुफे टेबल है आओ खाओ और जाओ. हम परोसते रहेंगे.

हो सकता है कि सरकार ने दूसरे क्षेत्रो में अच्छे काम किये हो पर सच ये भी है कि आतंकवाद के मुद्दे पर मोदी सरकार विफल ही है. देश की प्रत्येक जान कीमती है और अगर एक भी जान जाती है तो सरकार को इसकी जिम्मेवारी लेनी चाहिए. सच ये भी है कि देश युद्ध कि स्थिति में नहीं जाना चाहता पर एक सच ये भी है कि देश युद्ध की स्थिति में बीते ७० सालो से है. अगर देश के सबसे सफल सरकार का दम्भ भरने वाली NDA सरकार अपने ही लोगो के रक्त रोकने में विफल है तो ये सरकार की नाकामी ही है.

कभी कभी ऐसा लगता है की हम कोई डिस्काउंट स्कीम चला रहे हैं, इतनी आलोचना इतने लोगो के मरने पर,बाकि बचा के रखो अगली घटना होने तक. देश के राजनेताओ को ये बताने का समय आ गया है की देश निंदा और आलोचना करने से शांत नहीं होने वाला. जब भी ऐसी कोई घटना होती है तो प्रधानमत्री एक ट्वीट कर इसकी आलोचना कर देते हैं. गृह मंत्रालय भी कठोर शब्दो में हमलो की निंदा कर देता है. ऐसा लगता है हम निंदा करने के लिए ही सरकार चुनते हैं.

देश एक्शन चाहता है, रिएक्शन नहीं. अब समय है ये तय करने का कि हम कहा जाना चाहते हैं. अगर कश्मीर हमारा है तो हमारे लोगो को वह जाके उतनी ही सुरक्षा मिलनी चाहिए जितना देश के बाकि हिस्सों में मिलती है. और अगर प्रदेश और देश में अपनी सरकार होते हुए भी सरकार वो सुरक्षा नहीं दे सकती तो सरकार कम से कम मान ले की वो जो वादे करते सत्ता में लौटे थे उसे पूरा करने में वो विफल है. बाकि मान की बात तो चलती ही रहेगी.


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