क्या शिव सेना ने Self Goal किया है ?

Quora | Nov 12, 2019 02:11 PM


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अभी तक की जो परिस्थिति है उसमें शिव सेना ना घर की है और ना घाट की। लेकिन राजनीति में कुछ भी हो सकता है।

शरद पवार ने शिव सेना को राजनीति का अच्छा पाठ पढ़ाया है। शरद पवार के भरोसे के कारण ही शिव सेना भाजपा को आँख दिखा रही थी। शिव सेना का मानना था कि वो भाजपा से बराबरी का हिस्सा माँगेगी और भाजपा नहीं देगी तो वो एनसीपी और कांग्रेस के मदत से सरकार बनाएगी । एनसीपी ने पहले शर्त रखी कि शिव सेना को एनडीए से अलग होना होगा और शिव सेना के मंत्री ने मोदी मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया । उसके बाद सोमवार को शिव सेना और एनसीपी की दिन भर अलग अलग बैठक चलती रही और उद्धव ठाकरे ने सोनिया गांधी से भी फ़ोन पर बात किया। यह तय भी हो गया कि उद्धव मुख्यमंत्री और अजित पवार उप मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन कांग्रेस ने सही समय तक शिव सेना को समर्थन का पत्र नहीं दिया। शायद शरद पवार और सोनिया गांधी की यह सोची समझी चाल होगी। अब शिव सेना सभी तरफ़ से घिर गयी है।




अब एनसीपी को सरकार बनाने का अवसर मिला है। कांग्रेस और एनसीपी के 98 विधायक है और यह चुनाव से पहले का गठबंधन है। अब शायद शरद पवार उद्धव ठाकरे को बोलेंगे की तुम्हारी संख्या 56 है और मेरी संख्या 98 है। हम इंजन बनेंगे और तुम डब्बा बन जाओ। गैर भाजपा दलो के बीच अभी महाराष्ट्र में जम कर उठा पटक होगी। वैसे कल को शिव सेना कैसे कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को सही बताएगी? अगर शिव सेना के कोई क़दम नहीं उठाया तो भाजपा उसके वोट बैंक के एक हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लेगी। भाजपा के समर्थक दिन भर स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के विडीओ सोशल मीडिया पर चलते रहे जिसमें वो कांग्रेस के ख़िलाफ़ बयान दे रहे है। भाजपा राष्ट्रपति शासन लव इंतज़ार कर रही है। अगर मध्यावधि चुनाव भी होंगे तो शायद भाजपा को फ़ायदा होगा । लेकिन बहुत सारे विधायक फिर से चुनाव नहीं चाहेंगे ।



शिव सेना शायद अब एनडीए से बहुत आगे निकल चुकी है और उन्होंने अपने पत्ते बहुत जल्दी खोल दिए । यहाँ तक कि राज्य सबसे छोटी पार्टी कांग्रेस भी फूंक फूंक कर क़दम रख रही है। शिव सेना के आगे कुआँ है और पीछे खाई । दोनो जगह ख़तरा है लेकिन क़दम तो बढ़ना है। अगर शिव सेना कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाती है तो शरद पवार शिव सेना के सभी धमकी की हवा निकल देंगे। शिव सेना को महाराष्ट्र में अपनी भूमिका पर विचार करना होगा और वो देश की राजनीति के लिए चिंतित भी नहीं है।

अब तक यह देखा गया था कि शिवसेना और बीजेपी एक दूसरे पर तीखी आलोचना नहीं करते थे लेकिन अब दोनों खुलकर आमने सामने आएंगे और आने वाले समय में तीखी जुबानी जंग एक अलग स्तर पर पहुंच जाएगी।

बालासाहेब ठाकरे हमेशा से कांग्रेस के धुर विरोधी माने जाते हैं और उन्होंने सारी जिंदगी कांग्रेस का खुलकर विरोध किया है अब उनके पुत्र उद्धव ठाकरे उसी कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने जा रहे हैं अब देखने वाली बात यह होगी कि उद्धव ठाकरे यह बात अपने समर्थकों को कैसे समझाते हैं कि उनका फैसला सही है।








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