जानिए इस Real life James Bond के बारे में

Prashant Shekhar | May 24, 2017 01:05 PM


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24 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री चुने जाने के तुरंत बाद ही श्री नरेंद्र मोदी ने अजित डोवाल को अपना सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया. आइये जानते है भारत के इस खास देशभक्त और इनके पिछले इतिहास को.

अजित डोवाल 1967 बैच के केरला कैडर के आईपीएस अफसर है. शुरुआती पढाई अजमेर के मिलिट्री स्कूल से करके इन्होने इकोनॉमिक्स में मास्टर की डिग्री हासिल की और फिर सिविल सर्विसेज की परीक्षा उत्तीर्ण कर  I.P.S अफसर  बने. ये भारतीय पुलिस इतिहास के  इकलौते ऐसे पुलिस अफसर है जिनकी कीर्ति चक्र से नवाजा गया है. कीर्ति चक्र शांति काल में दिया गया दूसरा सबसे बड़ा शौर्य मैडल है. पुलिस सर्विसेज में रहते हुए इन्हे I.B में काम करने का मौका मिला जिसे इन्होने दोनों हाथो से अपनाया. आइए जानते है एक इंटेलिजेंस अंडरकवर अफसर के रूप में इनकी उपलब्धियां :


 

1976 में उत्तर पूर्वी राज्यों में लालडेंगा के उग्रवादियों के उपद्रव को रोकने का काम इन्होने बखूबी अंजाम दिया. फील्ड एजेंट के तौर पे इन्होने 7 में से 6 उग्रवादी संगठनों को सरेंडर के लिए मजबूर करके लालडेंगा की कमर तोड़ दी जिससे आखिरकार उसको भी शांति समझौते के लिए तैयार होना पड़ा.

 

1977 में जब अमृतसर में जरनैल सिंह भिंडरेवाला स्वर्ण मंदिर के अकाल तख़्त पर कब्ज़ा जमाये बैठा तो इन्होने उन खालिस्तानी अतन्क्वदिओ को पहले तो ये यकीन दिलाया की ये पाकिस्तानी जासूस है जो भारत में एक रिश्ता चालक के तौर पे रह रहे  है और उसे पाकिस्तान ने भिंडरा वाले की मदद करने को  भेजा है. अंदर पहुंच का उसने खुद भिंडरा वाले से बात चित की और खालिस्तानी अतन्क्वदिओ के पते, हाथियारों  की जानकारी संग्राह करके भारतीय फ़ौज को सौपी जिससे भारतीय फ़ौज ऑपरेशन ब्लू स्टार करने में सफल हो पायी.

 

लोहे के बदले लोहे का सिद्धांत इनको काफी अचे से पता है. इसी लिए इन्होने कश्मीरी मिलिटेंट्स का ब्रेन वास् करके उन्हें उल्टा भारत के साथ देने के लिए मंजूर किया और घाटी में आतंकवाद की घटनाओ को रोकने में भारतीय फ़ौज को काफी सहूलियत पहुंचाई.

 

पाकिस्तान के अंदर 7 साल तक ख़ुफ़िया तौर पे रह के उन्होंने पाकिस्तानी आई इस आई के ऑपरेशन्स की सूचना भारतीय फ़ौज को देने काम बखूबी किया. आई इस आई आज भी इनके लोहे को पहचानता है और इनके मास्टरमाइंड से डरता है .

 

म्यांमार में खपलांग के आतंकवादियों को ख़त्म करने का इनका ही ये प्लान था जिसे भारतीय फ़ौज ने बड़ी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया. मयंमार के ऑपरेशन के लिए अंतिम क्षणों में इन्होने ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के साथ अपना बांग्लादेश का दौरा रद्द कर दिया था.

बंगाल के ही वर्धमान में हुए एक छोटे से बम के धमाके की गंभीरता को उन्होंने काफी अच्छे से समझा जिसके तार फिर बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी जुड़े. बंगाल के उन मदरसों में गैर  कानूनी तौर पे इस्लाम के नाम पे जिहाद की पढाई होती थी, और ये मदरसे हवाला के पैसो को देश में लाने का आसान जरिया था.

 

अजित डोवाल साहब की जिंदगी रियल लाइफ जेम्स बांड की तरह है. हम उम्मीद कर सकते है की भारत के सुरक्षा की बागडोर काफी सुरक्षित हाथो में है.



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