क्यों अलग थलग पड़ गया है क़तर, क्या है इसका राजनैतिक असर ?

Nanhe Sipahi | Jul 06, 2017 10:07 PM


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तेल और गैस से परिपूर्ण क़तर को हालही में उसके मजबूत पड़ोसी अरब देशो के द्वारा अलग थलग कर दिया गया है. अरब संगठन क़तर पे आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं. राजनितिक सम्बन्ध को तब तक के लिए रोक दिया गया है जब तक क़तर अपनी नीति में बदलाव नहीं  लाता है.

आईये पता करते हैं इन सारे विवादों का कारण:

क़तर हमेशा से अपनी राजनितिक नीति को अपने हिसाब से तय  करते रहा है. लेकिन हालही में उनकी दो नीतियों ने उनके पड़ोसी अरब देखो को तंग किया है . पहला है क़तर का आतंकवाद को समर्थन. क़तर खुद ये कबूल करता है की उसने Muslim Brotherhood को समर्थन और हथियार दिए है लेकिन Al-Qaida और ISIS के समर्थन के बात को हमेशा से नकारा है.


दूसरा कारण है क़तर का ईरान के साथ राजनितिक सम्बन्ध जिसके तहत दुनिया के सबसे बड़े गैस फ़ील्ड्स को ये देश साझा करते हैं. ईरान अरबिया का सबसे बड़ा दुश्मन देश है.

किसने किसने क़तर के साथ सम्बन्धो को तोडा है?

सऊदी अरबिया, UAE और बहरैन ने सबसे पहले 5 जून को अपने राजनितिक सम्बन्ध ख़तम किये. इन देशो में रह रहे क़तर के निवासियों को 14 दिन की मोहलत दी गयी वापिस क़तर लौटने के लिए. Egypt ने भी क़तर से सम्बन्ध तोड़े लेकिन क़तर में रह रहे 1,80,000 लोगो पे कोई बंधन नहीं लगाए. उसके बाद यमन, लीबिया और मालदीव्स ने भी अपने सम्बन्ध क़तर से तोड़े. सऊदी अरबिया जो इकलौता देश है जो क़तर के साथ भूमि सीमा साझा करता है उसने समुद्री मार्ग के व्यापारिक सम्बन्ध पर भी रोक लगा दी. क़तर के किसी भी जहाज का सऊदी या किसी दूसरे देशो के बंदरगाहों में रोक लगा दी गयी.

इसका असर ये पड़ा की क़तर में जरुरी सामने की आपूर्ति जो मुख्यतः सऊदी अरबिया से होती थी उसपे पुरे तरह से रोक लग गयी है. लेकिन उसके बाद ईरान और टर्की द्वारा वायु मार्ग से खाने की आपूर्ति किये जाने से स्थिति में थोड़ा सुधार है.


क़तर के स्टॉक मार्किट में भी 10% की गिरावट आयी हुई है. क़तर ने इन प्रतिबंधों के बाद से करीबन $12 बिलियन का  घटा सहा है. देशो के बाजार को रेटिंग देने वाली एजेंसी मूडी ने भी क़तर की रेटिंग स्थिर से नेगेटिव कर दिया है.

इसका बड़ा असर 2022 फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए तैयार किये जा रहे स्टेडियम्स के निर्माण पे पड़ा है. कच्चे मालो की आपूर्ति एक समस्या बन गयी है. कच्चे मालो के दाम 10 गुना बढ़ गए हैं. इसका उपाय क़तर ने ओमान के रस्ते कच्चे मालो को लाकर के ढूढ़ा है.

आखिर क़तर के पड़ोसी अरब देश क़तर से क्या चाहते हैं?

  1. ईरान के साथ अपने सम्बन्धो को तुरंत ख़तम करे क़तर.
  2. आतंवादी संगठनों के साथ अपने रिश्तो को ख़तम कर रहे और आतंकवादी चेहरों को बाहर लाये
  3. हर उन संगठनों को जिसको सऊदी अरबिया, Egypt, अमेरिका के द्वारा आतंकी घोषित किया गया है, उनकी आर्थिक मदद बंद करे.
  4. अल-जज़ीरा को बंद करे और उसके जैसे बाकी मीडिया को भी.
  5. तुर्की के साथ अपने युद्धयाभासो को बंद करे और क़तर के अंदर तुर्की के सैन्य क्षेत्रो को हटाए.
  6. अरब देशो के साथ मिलके उनके राजनितिक , सैन्य और आर्थिक नीति के हिसाब से अपनी नीति बनाये.

 

इनसब माँगो पे क़तर का ये कहना है की अरब देश क़तर से अपनी स्वाधीनता लेना चाहते है जो की हरगिज संभव नहीं है.अमेरिका खुद इस विवाद को जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है क्युकी क़तर के अंदर ही अल-उदयदा में अमेरिका का सबसे बड़ा सैनिक बेड़ा मौजूद है. इस विवाद के शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ ने इसका श्रेय अमेरिका को देते हुए कहा की ये आतंकवाद के अंत की शुरुआत है.




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