व्यंग: मोदी की बुलेट अच्छे दिन जाने वाले है

Nanhe Sipahi | Sep 14, 2017 12:09 PM


News Image
राज कपूर और नरेंद्र मोदी का नया कनेक्शन सामने आया है. राज कपूर अपना जूता जापान से लाये थे, प्रधानमंत्री ट्रैन ला रहे हैं. एक दम फ़ास्ट ट्रैन हिंदुस्तान में दौड़ने वाला है ये अलग बात है की फ़िलहाल हिंदुस्तान अहमदाबाद और मुंबई के बिच ही माना जा रहा है. वैसे तो मोदी जी ने बनारस को क्वोटो जैसा बनाने की बात की थी. पर मोदी जी जापानी प्रधानमंत्री को बनारस नहीं ले जा पाए ना ही जापान को. राजधानी भी शिफ्ट हो गयी है "अहमदाबाद मां". वैसे आज सुबह सुबह राजधानी वाली ट्रैन भी शिफ्ट हुई है "अपनी पटरी से". भारत में रेल और रेलमंत्री दोनों ठीक से नहीं चल रहे हैं इन दिनों, दोनों कभी भी डी-रेल हो जाते हैं.

जापान की ट्रैन के साथ मेक इन इंडिया हो रहा है, मात्रा ०.१० % ब्याज दे कर. वैसे हमारा अपना अनुमान है कि ये बुलेट ट्रैन भारत और जापान दोनों की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. पहले वाली ट्रैन कभी भी कही भी अपनी मर्जी से रुक जाती थी , इससे जापानी तेल का का विज्ञापन पढ़ने की सुविधा यात्रियों को मिल जाती थी. कभी कभी कोई वेंडर ट्रैन में चढ़ कर इन्हे बेच पाने में सक्षम भी हो जाता था. बुलेट ट्रैन के आने से ऐसे किसी भी प्रकार का व्यापर बंद हो जाएगा और इससे जापान की अर्थव्यवस्था को भारी नुक्सान होने की सम्भावना है. छोटे व्यापारी मूंगफली, चना-चूर-गरम, गरम समोसे इत्यादि बेच कर घर का भरण पोषण कर लेते थे. बुल्लेट ट्रैन से इन छोटे क्षेत्रो को नुक्सान तो पहुंचेगा ही साथ साथ यात्रियों को भी ट्रैन का खाना खाने के लिए विवश होना पड़ेगा और अगर यहाँ का ठेका भी IRCTC को मिला तो समझिये की घर से पूरी सब्जी बांध के चलने का टाइम आ गया है.


बुलेट ट्रैन में किराया भी ज्यादा लगेगा और सुविधाएं भी कम हो जाएगी. हमारे यहाँ के लड़के जो वैक्यूम काटने में पारंगत थे और ये विद्या अपनी आने वाली पीढ़ियों को सहर्ष बाँटा करते थे उनके लिए तो मोदी जी कम से कम "अच्छे दिन" नहीं ला पाए. बुलेट ट्रैन के आने से देश की ये कला लुप्त हो जाएगी (क्यों कि मुझे नहीं पता कि वैक्यूम होगा की नहीं) और देश के कई छोकरो का वैवाहिक भविष्य भी आधार में लटक जाएगा. पहले लड़को की शादी में तकलीफ नहीं होती थी अगर रेलवे लाइन आपके गांव से गुजरता था. ये माना जाता था की वैक्यूम काट के ही सही पर ट्रैन यहाँ रूकती है इस लिए यातायात की कोई समस्या नहीं होगी.

बुलेट ट्रैन के आने का सबसे प्रतिकूल प्रभाव बंगाल में पड़ेगा. धरना प्रदर्शन और ट्रैन रोको अभियान को काफी नुक्सान होगा. क्यों कि आप अगर आंदोलन के उन्माद में ट्रैन रोकने पटरी पर सोये और आप ट्रैन को नहीं दिखे तो आप भी दुबारा नहीं दिखेंगे. मोदी की बुलेट ट्रैन कई मामलो में प्रजातंत्र की हत्या है. पहले ट्रैन के खिड़कियों पर साइकिल, दूध के कंटेनर और कई दूसरे प्रकार की वस्तुओं का भी आयत निर्यात किया जाता रहा था, देश को ये सुविधा भी मिलनी लगभग बंद हो जाएगी. ट्रैन के गेट पर बैठ कर सर बाहर निकल कर किया जाने वाला वो मनोरम सफर भी इतिहास की बात हो जाएगी हाँ कवियों को कवितायेँ लिखने के लिए एक नया विषय जरूर मिलेगा.


चित्र quora से लिया गया है 

सबसे प्रतिकूल प्रभाव हर दस कदम पर बनाये गए हाल्टों पर पड़ेगा. मेरे शहर को ही ले लीजिये पटना स्टेशन पर उतरने से पहले आपकी जान ३-४ हॉल्ट तो ले ही लेते थे. सचिवालय हॉल्ट पर आधा सचिवालय उतर जाता था. अब जब की मोदी जी फ़ास्ट बुलेट ट्रैन ला रहे है तो बिहार सचिवालय समझिये ठप पड़ जाएगा. बिहार सरकार काम नहीं कर पाएगी (हम ऐसा बिलकुल भी नहीं कह रहे हैं कि काम कर रही है). इससे विकास दर प्रभावित हो जाएगी. समझिये कि नोटेबंदी वाला हालत हो जाएगा बुलेट ट्रैन का भी.



बहुत सारी चीज़ें बदल जाएंगी इस बुलेट ट्रैन से. पहले यात्री टाइम पास के लिए ही सही अपने सहयात्रियो के पुरे खानदान के चिथड़े निकाल लेते थे. सम्बन्ध भी निकल आते थे. फिर खाने का आदान प्रदान कर दुबारा मिलने के वादे किये जाते थे. कुछ नालायक लौंडे पैंट्री कार के १० चक्कर इस लिए लगाते थे कि शायद कोई ढंग की कन्या दिख जाए. चचा तास पीट कर खुश हो लिया करते थे. कुछ बेवड़े तो समझिये ट्रैन के शौचालय के पानी से ही काम चला लेते थे और तो और पहले वाले शौचालय को सरकार ने अनधिकृत स्मोकिंग जोन भी बना रखा था. कुछ लड़के ट्रैन यात्रा को फ़िल्मी सफर समझते थे, खुद तो पुरे आवाज़ में सिनेमा देखते ही थे, सहयात्रिओं को भी दिखाते थे. कुछ ज्यादा काबिल लोग देश की विषम परिस्थितयों पर ज्ञान बाँट रहे होते थे और कुछ उनसे ज्यादा काबिल उनको गलत साबित करने की भरसक कोशिश कर रहे होते थे. एक आधा लोग तो ऐसे थे जो सिर्फ खाने और निकालने के लिए ही ऊपर वाले बर्थ से निचे उतरते थे. उनके लिए सोना ही जिंदगी का मकसद हुआ करता था. कुछ हमारे जैसे भी होते थे जो खुद को साहित्य का पुरोधा समझते थे और हर बात में ये कोशिश करते थे कि सामने वाले को बता सके की मेरी साहित्य में कितनी रूचि है .सब नष्ट हो जाएगा. कहना बस इतना है की पहले वाले सफर का आनंद अब कहा रहेगा.


News Image

क्या शिव सेना ने Self Goal किया है ?

अभी तक की जो परिस्थिति है उसमें शिव सेना ना घर की है और ना घाट की। लेकिन राजनीति में ...


News Image

एक वक्त था जब एक पाकिस्तानी जासूस के लिए हिंदुस्तानी जनता ने लगाए थे ज़िंदाबाद के नारे

पाकिस्तानी जासूस – ये कहानी है बीकानेर की, जहां के लोगों के बीच एक दिन अचानक से किसी अंजान की ...


News Image

चीन में शादी के लिए दूसरे एशियाई देशों से अपहरण कर लाई जा रही हैं लड़कियां

नई दिल्ली | आए दिन भारत के पूर्वी राज्यों खासकर बिहार से ऐसी खबरें आती हैं कि किसी शादी-विवाह में ...


News Image

विराट-अनुष्‍का की शादी थी 'नकली' अब यहां दोबारा करनी होगी, इस दस्‍तावेज से खुला राज

विराट कोहली और अनुष्‍का शर्मा की शादी को लेकर नया खुलासा हुआ है। खबरों की मानें तो दोनों को दोबारा ...


News Image

जब भगवान शिव की हुई जलती लकड़ी से पिटाई

देवों में देव महादेव की कोई जलती लकड़ी से पिटाई करे ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता लेकिन, यह बात ...


News Image

गुजरात चुनावो के बीच झूलता कश्मीर

2014 के लोकसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी ने कई नारे उछाले थे, उनमें से एक नारा था — “मिनिमम ...