मिड डे मील से जुड़े कुछ चौकाने वाले साक्ष्य

Nanhe Sipahi | Jul 03, 2017 12:07 PM


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एक पुरानी कहावत है 'एक स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मस्तिष्क का विकास होता है ।' वहीँ हरवर्ट स्पेंसर के अनुसार 'किसी भी राष्ट्र का स्वास्थ्य उसकी सम्पदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है ।' एक महान दार्शनिक हिपोक्रेटिस ने कहा था 'संतुलित भोजन अपने आप में औषधियों का प्रतिस्थानी है ।' इन्ही बातों को आधार मानते हुए 'मिड डे मील ' योजना शुरू की गयी । 19 अगस्त 1995 में मिड डे मील की योजना शुरू की गयी ।उस समय प्रत्येक छात्र को इस योजना के अंतर्गत हर माह 3 kg गेंहूं और चावल उपलब्ध कराया जाता था ।लेकिन सिर्फ खाद्यान दे कर उन बच्चों के स्वास्थ्य पर उपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता था ।सबसे पहले तमिलनाडु में मिड डे मील की शुरुआत की गयी और ये पाया गया की उससे बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी अच्छा असर पाया गया ।देखा गया की बच्चों की स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्ततें काम हुई और बच्चों का स्कूल के तरफ झुकाव भी बढ़ा ।स्वादिस्ट भोजन के इंतज़ार में बचे स्कूल जाते और साथ ही साथ स्कूल से drop out में भी काफी कमी आई ।और तब ही भारत सरकार द्वारा  यह निर्देश दिया गया की सभी प्रदेशों में बच्चों हो दोपहर क अवकाश में मिड डे मील में पका पकाया हुआ खाना दिया जायगा 



मिड डे मील में पका हुआ खाना देने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका संख्या 196 /2001 में 28-11-2001 भारत सरकार को निर्देश दिया गया था की 3 महीने के अंदर सरकार प्रत्येक राजकीय और राज्य सरकार से सहायता प्राप्त primary school में पका पकाया भोजन उपलब्ध कराया जाये ।इस भोजन में 300 calories ऊर्जा और 8-12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध होगा ।साथ ही साथ माननीय उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया ये भोजन बहुत ही अच्छे quality का होगा ।इस योजना का मुख्या उद्देश्य यह है की बच्चे कुपोषण से बाहर निकल कर अपनी पूर्ण क्षमता क साथ सही तरह से शिक्षा ग्रहण करें।

इसके पहले पड़ाव में यह scheme 2408 blocks में शुरू किया गया ।अप्रैल 2002 से इस योजना सारे सरकारी प्राथमिक विद्यालयों अर्थार्त class 1 से 5 तक के स्कूलों में लागु कर दिया गया और बाद मैं यह बढ़कर कक्षा 8 तक लागु कर दिया गया ।बाद में सितम्बर 2004 में प्रोटीन और calories की मात्रा बढ़कर 12 ग्राम और 450 कैलोरीज कर दिया गया।



मिड डे मील योजना के अंदर ये provision है की जिन बच्चों की उपस्थिति 80 % होगी उन्ही बच्चों को अगले साल मिड डे मील के लिए ला सकते हैं ।इस के वजह से स्कूल के बच्चे नियमित रूप से स्कूल में आने लगे ।लड़कियों को भी स्कूल जाने दिया जाने लगा ।इस scheme के कारण बच्चों में कई अछि आदतें भी आयी | जैसे -खाना खाने के पहले हाथ धोना ,अपने प्लेट खुद साफ़ करना ,साफ़ पानी पीना|
                                 
इस योजना के अंतरगर्त सरकार द्वारा कुछ guidelines भी दिए गए थे ।जैसे -

१.इस स्कीम के अंतरगर्त स्कूल में खाना बच्चों को देने के पहले स्कूल के किसी teacher को चखना है और साथ ही साथ एक या दो parent को भी चखना  है ।

२. खाद्य पदार्थों को एक जगह जमा कर के रखने के लिए storage की व्यवस्था भी की जानी चाहिए ।ये स्कूल के प्रिंसिपल या गांव के मुखिया के घर में नहीं रखा जा सकता है ।

३.मिड डे मील स्कीम में क्लास 5 तक के बच्चे को एक दिन में 3 .86 पैसे दाल ,चावल,फल,मिठाई सबकुछ मिला कर खर्च किया जाना चाहिए ।वहीँ क्लास 8 के बच्चों को 5 .78 खर्च करना जरुरी है ।

४.खाना बनाते समय double fortified नमक उपयोग किया जाना जरुरी है ।

५.मिड डे मील खा कर यदि किसी भी बच्चे की तबियत खराब होती है तब वैसी स्थिति में इसकी प्रिंसिपल की है की वो distric megistrate को इसकी जानकारी दे ।



हमारा देश गांव का देश है और हमारे देश में ऐसे वर्ग भी हैं जहाँ एक परिवार में  कमाने वाले काम है और खाने वाले ज्यादा ,एक कमाने वाले पे 7 से 8 खाने वाले हैं ।ऐसी हालत में लोग इंतज़ार करते थे की कब हमारा बचा बड़ा होगा और वो काम करना शुरू कर देगा ।ऐसे लोगो के लिए मिड डे मील वरदान साबित हुई है क्योकि ऐसे में बच्चों को स्कूल इसलिए भेजा जाने लगा की कम से कम एक टाइम का खाना तो मिल जायगा ।अतः वो बच्चों को स्कूल में एडमिशन करने लगे और स्कूल भेजने लगे ।

चूँकि यह योजना बच्चो के शारीरिक विकास के लिए लाई गई थी ताकि हमारा देश कुपोषण से हो रहे मुश्किलों से बाहर निकले  लेकिन HRD के द्वारा संचालित इस योजना को भ्रष्ट्राचारियों ने मुनाफा कमाने का जरिया बना लिया है ।आइये जानते हैं मिड डे मील से जुडी ऐसी ख़बरों के बारे में जो हमें चौका देंगी ।

  • दिल्ली ; मिड डे मील खाने से 50 लडकियां बीमार ,4 की हालत गंभीर 
  • ओर्रिसा ;मिड मील खाने से 77 बच्चे हुई बीमार 
  • आगरा ;दूध पी कर खून की उल्टियां करने लगे बच्चे 
  • बिहार ;मिड डे मील हादसे में स्कूल की प्रिंसिपल दोषी पायी गए 
  • उत्तर प्रदेश ;मिस डे मील के खाने में मिला सांप 

और झारखण्ड की खबर तो बिलकुल चौंका देने वाली है ,एक नौ साल की बची जो एक छोटे से कसबे में रहती है ,उसके गांव के प्राथमिक विद्यालय में उसका नाम दर्ज़ है ,उसे अपना पेट भरने के लिए चूहों और खरगोश का शिकार करना परता है ।आपको नहीं लगता है की यह हमारे लिए बहुत ही शर्म की बात है ।इस तरह से मिड डे मील होने के बाद भी बच्चे संक्रमण और कुपोषण का शिकार हो रहे हैं | कारण और कुछ नहीं बस भ्रष्टाचार ही है | ऐसा पाया गया है की स्कूल में जो फण्ड या खाद्य सामग्री आती है वो प्रिंसिपल और टीचर मिल के और स्कूल के अन्य कर्मी मिल के आपस में बाँट लेते हैं ।और बच्चों को जैसा तैसा खाना खिला देते हैं इस साल के बजट में देश भर के 11 .5 लाख government school में 10 .03 करोड़ बच्चों के लिए 10 ,000 करोड़ रुपये allot करवाए गए हैं ।

इन्ही परेशानियों को देखते हुऐ HRD मिनिस्टर' प्रकाश जावड़ेकर 'ने मिड डे मील योजना की जर्जर हालत को स्वीकारा और कहा की आज के प्राथमिक विद्यालय सिर्फ आने ,खाने और जाने तक ही सिमित हैं और हमारे स्कूल सिर्फ मिड डे मील की जगह बन के रह गए हैं ।
इन सारी परिस्थिति को देखते हुऐ सरकार ने यह कहा कि मिड डे मील उन्ही लोगो को मिलेगा जिनके पास आधार कार्ड होंगे ,परन्तु कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने यह कहा कि आधार संख्या के आभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जायगा  और अन्य पहचान पत्र को स्वीकार कर लिया जायगा ।एक आधिकारिक बयान में यह कहा  गया की  मिड डे मील में बाल विकास योजना के तहत स्कूल और आंगनवाड़ियों को कहा गया हैं की ये बच्चों की आधार संख्या एकत्र करें और जिन बच्चों क पास आधार कार्ड नहीं हैं उनके लिए मिड डे मील के लाभों को जारी रखे ।

सरकार ने इस बात पे जोर दिया हैं की पिछले ढाई सालों में कुछ योजनाओं को आधार कार्ड से जोड़ने पर गड़बड़ी रुकने क बाद 49 ,000 करोड़ की बचत हुऐ है।ये थी मिड डे मील से जुडी कुछ जानकारियां जो मैंने आपके साथ साझा किया है ।


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