कुछ भी तो नहीं बदला

Nanhe Sipahi | Aug 21, 2017 01:08 PM


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देश में बड़ी बैचनी है, बिहार बाढ़ से त्रस्त है, उत्तर प्रदेश में बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर गए, रायपुर से भी ऐसे ही घटना की सूचना मिल रही है, ट्रैन हादसे में २० से ज्यादा लोगो की जाने चली गयीं. देश की राजनीत की दशा धरताल पर ही है. हम किस पर भरोसा करें? किस पर. कांग्रेस तो इंदिरा टिफ़िन सर्विस चलाने में बिजी है, बिहार प्रदेश के मुख्यमंत्री जनता दाल यूनाइटेड को यूनाइटेड करने में लगे हैं, बिहार बाढ़ से मर रहा है, और देश का किसान सुखाड़ से. बीजेपी ऑक्सीजन की कमी ढूंढ रही है, रेल पटरी ढूंढ रही है. ममता बनर्जी का कल का बयान सुन लीजिये, अब उनको भी नरेंद्र मोदी से परहेज़ नहीं है, अमित शाह के तानाशाही रवैये से तकलीफ है, देश में हो रही घटनाओ पर तकलीफ नहीं है. शिवराज सिंह चौहान अभी किसान आंदोलन से उबार नहीं पाए हैं. तमिलनाडु की शशिकला जेल में पर्स टांगे बाहर घूमने निकल जा रही हैं, अन्ना द्रमुक से किस किस को सरकार में शामिल किया जाये केंद्र उसमें व्यस्त है, अब क्यों कि सुशासन बाबू NDA की तरफ से खेल रहें हैं बिहार को १.२५ लाख करोड़ वाला पैकेज जल्दी मिल जाने की हवा चल रही हैं. सिद्धारमैया कर्नाटक में चुनाव की तैयारी में लगे हैं, रोड तैयार कब होगा पता नहीं. केजरीवाल EVM को दोष दे चुके हैं और अब उनको भी सरकार से कोई मतभेद है ऐसा दिख नहीं रहा है. सबको बस अपनी पड़ी है. देश राम भरोसे है और राम सुप्रीम कोर्ट के भरोसे.

अब सोचना ये है कि हम क्या करें, किसके पास जाएंगे हम, अब कैसी सरकार चाहिए, १९७४ में इंदिरा को अपदस्त कर दिया फिर उसी इंदिरा को दुबारा चुना, अन्ना के इंडिया अगेंस्ट करप्शन से क्या निकला है वो देश के सामने है, विकास पुरुष कि उपमा लिए मोदी को सत्ता पर बैठा दिया हमनें, अभी क्या बदला है हवा के अलावा. देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से जो दी गयी नौकरियों की संख्या बताते हैं उसके उलट करीब २० दिन पहले वित्तमंत्री कोई और संख्या बताते हैं. किस बार भरोसा करे. सोच के देखिये क्या देश बुलेट ट्रैन के लिए तैयार है? जो ट्रैन चल रही है वही चल जाये ठीक से, समय से, बिना जान लिए और दिए.



इंदिरा टिफ़िन की ज्यादा जरुरत बैंगलोर को थी या बिहार को, सिर्फ इस लिए की अगले साल कर्नाटक में चुनाव होने है अपने १० रुपए की थाली बेचैनी शुरू कर दी. ४ साल से कहा सोई थी यही कांग्रेस. इंदिरा टिफ़िन भी तो कांग्रेस की विफलता का ही स्मारक है. जो देश को ७० सालो में पेट भर अन्न नहीं दे पाए वही लोग कर्नाटक में अन्न सांभर बेचेंगे. १० रुपये प्लेट भर. अपना ही गणित खराब है. अभी कुछ सालो पहले कांग्रेस ने दावा किया था की ५ रुपये में देश का गरीब भर पेट खाना खा सकता है तब तो राहुल गाँधी हर प्लेट पर ५ रुपए की कमाई कर रहें हैं.

महिला सुरक्षा के नाम पर, प्याज़ के दाम पर, किसानो के हाल पर, पाकिस्तान के साथ सम्बन्ध पर. नौकरियों पर ये सब छोड़िये राम पर भी हमसे वोट मांगे गए. क्या हुआ. क्या बदला. राम अभी भी टाट में है. आप और हम अब भी अपनी केचुलियों में है. बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी वाली केचुलियों में. कुछ भी तो नहीं बदला.



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