हिंदुस्तान को बदलना होगा

Nanhe Sipahi | Aug 06, 2017 11:08 AM


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ठेकेदारों सावधान. आप अपने गालियों का सिलसिला जारी रखें. हमें तो बोलने की, लिखने की आज़ादी है और खुदा कसम आपके बाप दादाओ ने ही ये आज़ादी हमें दिलाई है. और हम पूरा प्रयास कर रहे है कि आपके बाप दादाओ को हम नाराज़ तो हरगिज़ न करें. इसलिए बोलते रहेंगे, बेबाकी से. हमारे अंदर का यूरेनियम जब तक ज़िंदा है विस्फोट होते रहेंगे. वैसे भी जिन्हे बोलने की आज़ादी नहीं चाहिए थी वो पहले ही अपना हिस्सा लेकर जा चुके हैं और युटुब और फेसबुक देखिये सर पीटते दिखाई दे जाएंगे.

अभी कुछ दिनों पहले बिहार में भूकंप आया, छोटा मोटा नहीं, ऐसा कि रिएक्टर पैमाना नेस्तोनाबूत हो गया. राजनीत अपने चरम पर थी. ऐसा कि इस्लाम तुष्टिकरण को धर्मनिरपेक्षता की परिभाषा बताने वालों का पूरा ब्रिगेड सकते में है. एक भाई साहब जो नाम से और अपने मज़हब से मुस्लमान थे जय श्री राम के नारे तक लगाने लग गए. यह भी बोल गए की वंदे मातरम से भी उन्हें परहेज़ हरगिज़ नहीं है. वैसे हमें ख़ुशी है कि भाई साहब रीढ़ वाले थे बोले तो बोले और टिके भी रहे की जो बोला सही बोला. मेरे याद से ये अपने तरह का ये पहला केस होगा जिसमें तत्कालीन भारत के एक मुस्लिम नेता ने राम को इतनी तवज़्ज़ो दी. मामला यही रुक जाता तो खबर नहीं बनती.



अब उनपर फतवा है, इस्लाम से बहार निकलने वाले टोल गेट की फ्री एंट्री कर दी गयी है, मतलब आप ने जकड़न तोड़ने की कोशिश की है और हमें वो पसंद नहीं आया. और अगर हमें ये पसंद नहीं आया तो आप इस्लाम में नहीं रह सकते. वैसे हिंदुस्तान के संविधान में आपको आपके खुदा की इबादत करने की पूरी परमिशन है, पर हमारे हिंदुस्तान में कई हिंदुस्तान है. हमारे यहाँ संविधान से ऊपर बहुत सारी चीज़ें है. धर्म सबसे ऊपर है. अब समझना ये है की फतवा डाल कर आप हमें इस्लाम से बेदखल तो कर सकते हैं पर खुदा का ठेका भी आपके पास ही है क्या? वहां से कैसे बेदखल कर देंगे. अगर गलत चीज़ों पर फतवा निकालने का इतना शौख है तो एक २ कश्मीरी पथरबाज़ों और जिहाद के नाम पर आतंक की दुकान चलने वालो पर भी ठोक दो, उन्हें बेदखल कर के दिखाओ, तब कोई बात है.

सवाल ये है कि जो धर्म का ठेका लिए घूम रहे हैं उन्हें कौन समझाएगा की इस्लाम या हिन्दू धर्म किसी की बपौती नहीं है. हमें उन्हें बताना पड़ेगा की आप मेरे मजहब का हिसाब मत लगाइये की हमें कब क्या करना है और क्या नहीं . हम वही करेंगे जो हमें ठीक लगेगा. क्यों कि आपके फतवो से अब देश डरने वाला नहीं है. आप तो मेरे संगीत सुनने पर फतवा निकालो, मेरे चेस खेलने पर भी, आप मेरे कपड़ो पर, मेरे बोलने पर फतवा निकालो पर मैं आपको बता दूँ की आपके ठेकेदारी की दुकान जल्द ही बंद हो जाएगी. फतवो का जो ये पूरा बुफे टेबल सजा रखा है उसमें नए मुसलमानो के अंदर ज्यादा कुछ परोसने के लिए है कुछ नहीं क्यों कि हम जानते हैं इस नए दौर में मुल्ले मौलवियों के बातों में वजन थोड़ी कम गयी है.

हम आपको एक लिस्ट पढ़ कर सुनते हैं और आप खुद सोचिये की २१वी शताब्दी में कितनी प्रासंगिक हैं ये फतवे -

१. एक फतवा ऐसा भी था जिसमें औरतो को फुटबॉल देखने से रोक लगा दी गयी वो भी इस लिए क्यों की फुटबॉल खेलते समय पुरुषो के घुटने के ऊपर का हिस्सा दिख सकता है.

२. उसके बाद एक फतवा ऐसा भी आया जहा ये कहा गया की पुरुष ऐसे कपडे पहने जिससे घुटने के ऊपर का कोई भी हिस्सा नहीं दिखना चाहिए.

३. एक फतवा ऐसा भी आया जिसमें ये कहा गया की धरती फ्लैट है और सूर्य धरती के चारो ओर चक्कर लगाता है.

४. एक फतवे के अनुशार महिलाओ को टॉमबॉय लुक की आजादी नहीं है क्यों वो मानविक प्रवृति के विरुद्ध है.

५. रशद हस्सान खलील ने एक फतवा जारी किया जिसमें कहा की अगर महिलाये और पुरुष निर्वस्त्र हो कर सम्भोग करेंगे तो उनका निकाह अमान्य हो जाएगा.

अब आप सोचिये की हमारे खाने, पिने, खेलने, पेहनने, सोचने और जीने के तरीके पर फतवा हो तो क्या करना चाहिए. क्या ऐसे फतवो को हमें मानना चाहिए. या इनकी ऐसे की तैसी कर देनी चाहिए.




वैसे हमारा देश बड़ा विचित्र है, विचित्र इस लिए क्यों कि यहाँ राम राज्य सबको चाहिए, राम राज्य वाले वजूद में सबको यकीन हैं पर राम के वजूद पर हम डिबेट कर रहे हैं. सर्टिफिकेट ब्रिगेड भी पूरी एक्टिव हैं अगर एक पाकिस्तान जाने का वीजा लगवा रहा है तो एक इस्लाम से बहार जाने का. अब मुद्दा ये है की राम जिस देश के वजूद में बस्ते है उनकी अगर जय कह ही दिया तो इस्लाम खतरे में कैसे पड़ गया. खुदा कसम, खुदा इतना कमजोर नहीं की आप उस खुदा को संभाले. वो आपको और मुझे संभाल रहा है ये मत भूलिएऔर अगर किसी ने जय श्री राम कह ही दिया तो किसकी अम्मा खाट पकड़ने वाली है, असहनशीलता की दुहाई मत दीजिये, पहली पाठशाला आपका अपना घर है.



ईद की सेवइयां खाने टोपी लगाए जब हम अपने दोस्तों के घरो में जाते हैं तब हमारा धर्म खतरे में नहीं पड़ता क्यों की तब हिंदुस्तान बड़ा हो जाता है, हमारी दोस्ती और हमारा भाईचारा और भी पक्का हो जाता है, बस मुल्ले मौलवियों से बाहर आने की जरुरत है, ये समझने की जरुरत हैं कि हिंदुस्तान ही एक ऐसा वाहिद मुल्क है जिसे हमने न फिलिस्तीन बनने दिया न इजराइल. हमारे अंदर पुरे विश्व की प्रेरणा है, मत भूलिए हम ही वशुदेव कुटुम्कम है - मतलब पूरा विश्व ही मेरा घर है. उम्मीद है मतलब आप समझ ही गए होंगे.


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